Tag Archives: स्‍वामी आनंद प्रसाद

एक काली अमावस—लादेन (कविता)

काल बन कर निगल गई उस काली परछाई को हो गई जो समय के गर्त में दफ़न जो समझता था अपने को काल का पर्यायवाची कलंक-कलुषित जीवन मिटा दिया उस काल ने फिर एक बार कि शायद ले सके कोई … Continue reading

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गाड़रवाड़ा—एक परिक्रमा—(भाग–1)

मुल्‍ला जी—(आनंद मोहम्‍मद) मुल्‍ला जी, हां ये नाम सुन का आप भी जरूर थोड़ा चोंकोगे। मैं भी उसे देख कर थोड़ी दे के लिए अवाक सा रह गया। मन पर चल रहा विचारों का शोर थोड़ी देर के लिए थम … Continue reading

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सामाजिक तल पर भारत बड़ा कठोर है—ओशो

प्रश्न—भारतीय संस्‍कृति बड़ी सहिष्‍णु संस्‍कृति रही है। बुद्ध ईश्‍वर को नहीं मानते थे, पतंजलि ने भी ईश्‍वर को इंकार कर दिया था। जब आप अमेरिका में पाँच वर्ष रहे, तब क्‍या आपने इस फर्क को देखा? ओशो—मैंने फर्क देखा है। … Continue reading

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उजाला—कविता

कब तक खड़ा रहेगा ये उजाला मेरे द्वारा पर और करता रहेगा यूं तन्‍हा मेरा इंतजार… पर मैं हूं कि आंखें बंद किये उलझा हूं किन्‍हीं अंधेरी गलियों में और ढूंढ रहा हूं, उन आस्‍था और विश्‍वासों में कुछ वादे … Continue reading

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स्त्री पहली बार चरित्रवान हो रही है—ओशो

ओशो—तुम्‍हारे चरित्र का एक ही अर्थ होता है, बस कि स्‍त्री पुरूष से बंधी रहे, चाहे पुरूष कैसा ही गलत हो। हमारे शास्‍त्रों में इसकी बड़ी प्रशंसा की गई है। कि अगर कोई पत्‍नी अपने पति को—बूढ़े, मरते, सड़ते, कुष्‍ठ … Continue reading

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सेक्‍स से मुक्‍ति: सत्‍यम शिवम् सुंदरम्

प्रश्‍न—किसी ने ओशो से पूछा कि वह सेक्‍स से थक गया है। ओशो—सेक्‍स थकान लाता है। इसलिए मैं तुमसे कहता हूं कि इसकी अवहेलना मत करो। जब तक तुम इसके पागलपन को नहीं जान लेते, तुम इससे छुटकारा नहीं पा … Continue reading

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सेक्‍स और भोजन का गहरा संबंध–ओशो

प्रश्न—मेरे बदन में बहुत काम-ऊर्जा है। जब मैं नाचती हूं, कभी-कभी में महसूस करती हूं कि मैं पूरी दुनिया को खत्‍म कर दूंगी और किसी स्‍थिति में इतना क्रोध और हिंसा मेरे भीतर उबलती है कि मैं अपनी ऊर्जा को … Continue reading

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भोजन की टेबल आनंदपूर्ण होनी चाहिए: ओशो

भोजन की टेबल आनंदपूर्ण होनी चाहिए: ओशो जो हम खाते है, उससे भी ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण यह है कि हम उसे किस भाव-दशा में खाते है। उससे भी ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है। आप क्‍या खाते है। यह उतना महत्‍वपूर्ण नहीं है। जितना … Continue reading

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जवान रहना है तो मौन हो जाओ? –आइंस्‍टीन की क्रांतिकारी खोज

अल्‍बर्ट आइंस्टीन ने खोज की और निश्‍चित ही यह सही होगी, क्‍योंकि अंतरिक्ष के बारे में इस व्‍यक्‍ति ने बहुत कठोर परिश्रम किया था। उसकी खोज बहुत गजब की है। उसने स्‍वयं ने कई महीनों तक इस खोज को अपने … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो—( 10 ) ओशो

एक मात्र विकल्‍प: एक विश्‍व सरकार (अमेरिका में तथा विश्व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो—( 9 ) ओशो

गरीबी : जिम्‍मेदार कौन (अमेरिका में तथा विश्व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो–[8}—ओशो

मरने की स्‍वतंत्रता होनी चाहिए– (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो——7 ओशो

देश और धर्म: झूठी लकीरें—ओशो (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो——6 (ओशो)

अपनी खोज आप करो—ओशो (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग … Continue reading

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कोई तो अमीरों का भी गुरु हो? भाग–5 (—ओशो)

मेरा कोई जीवन-दर्शन नहीं है–ओशो (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक … Continue reading

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पोनी एक कुत्‍ते की आत्‍म कथा—(अध्‍याय—14)

मेरा जंगल में खो जाना– धीरे-धीरे मेरा स्‍वास्‍थ ठीक हो रहा था। अब खाना भी हजम होने के साथ-साथ मुझे भूख भी लगने लगी। इसी लिए पापा जी मुझे रोज जंगल में घुमाने के लिए ले जाते थे। पर इतवार … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु—भाग–3 (ओशो)

(अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग ही प्रकाशित हुआ है।) … Continue reading

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सृजनात्‍मकता ही प्रेम है, धर्म है—कथा यात्रा (ओशो)

एक महान सम्राट अपने घोड़े पर बैठ कर हर दिन सुबह शहर में घूमता था। यह सुंदर अनुभव था कि कैसे शहर विकसित हो रहा है, कैसे उसकी राजधानी अधिक से अधिक सुंदर हो रही है। उसका सपना था कि … Continue reading

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कोई तो अमीरों का भी गुरु हो? भाग–2 (—ओशो)

(अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग ही प्रकाशित हुआ है।) … Continue reading

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कोई तो अमीरों का भी गुरु हो?—ओशो

(अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग ही प्रकाशित हुआ है।) … Continue reading

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