(फ्री हिन्दी अंग्रेजी ओशे प्रवचन और ई-बुक)http://www.oshoba.org/
आनंद प्रसाद
ओशो की किरण जीवन में जिस दिन से प्रवेश किया, वहीं से जीवन का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ, कितना धन्य भागी हूं ओशो को पा कर उस के लिए शब्द नहीं है मेरे पास.....अभी जीवन में पूर्णिमा का उदय तो नहीं हुआ है। परन्तु क्या दुज का चाँद कम सुदंर होता है। देखे कोई मेरे जीवन में झांक कर। आस्तित्व में सीधा कुछ भी नहीं है...सब वर्तुलाकार है , फिर जीवन उससे भिन्न कैसे हो सकता है।
कुछ अंबर की बात करे,
कुछ धरती का साथ धरे।
कुछ तारों की गूंथे माला,
नित जीवन का एहसास करे।।
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Tag Archives: स्वामी आनंद प्रसाद
तंत्र-सूत्र—विधि-08
आठवीं श्वास विधि: आत्यंतिक भक्ति पूर्वक श्वास के दो संधि-स्थलों पर केंद्रित होकर ज्ञाता को जान लो। इन विधियों के बीच जरा-जरा से है, तो भी तुम्हारे लिए वे भेद बहुत हो सकते है। एक अकेला शब्द बहुत फर्क पैदा … Continue reading
तंत्र-सूत्र—विधि-07
सातवीं श्वास विधि: ललाट के मध्य में सूक्ष्म श्वास (प्राण) को टिकाओ। जब वह सोने के क्षण में ह्रदय तक पहुंचेगा तब स्वप्न और स्वयं मृत्यु पर अधिकार हो जाएगा। तुम अधिकारिक गहरी पर्तों में प्रवेश कर रहे हो। ‘’ललाट … Continue reading
तंत्र-सूत्र—विधि-06
सांसरिक कामों में लगे हुए, अवधान को दो श्वासों के बीच टिकाओ। इस अभ्यास से थोड़े ही दिन में नया जन्म होगा। ‘’सांसरिक कामों में लगे हुए, अवधान को दो श्वासों के बीच टिकाओ…।‘’ श्वासों को भूल जाओं और उनके … Continue reading
तंत्र-सूत्र—विधि-05
भृकुटियों के बीच अवधान को स्थिर कर विचार को मन के सामने करो। फिर सहस्त्रार तक रूप को श्वास-तत्व से, प्राण से भरने दो। वहां वह प्रकाश की तरह बरसेगा। यह विधि पाइथागोरस को दी गई थी। पाइथागोरस इसे लेकर … Continue reading
तंत्र-सूत्र—विधि—04
या जब श्वास पूरी तरह बाहर गई है और स्वय: ठहरी है, या पूरी तरह भीतर आई है और ठहरी है—ऐसे जागतिक विराम के क्षण में व्यक्ति का क्षुद्र अहंकार विसर्जित हो जाता है। केवल अशुद्ध के लिए यह कठिन … Continue reading
तंत्र-सूत्र—विधि—03
या जब कभी अंत: श्वास और बहिर्श्वास एक दूसरे में विलीन होती है, उस क्षण में ऊर्जारहित, ऊर्जापूरित केंद्र को स्पर्श करो। हम केंद्र और परिधि में विभाजित है। शरीर परिधि है। हम शरीर को, परिधि को जानते है। लेकिन … Continue reading
तंत्र-सूत्र—विधि—02
जब श्वास नीचे से ऊपर की और मुड़ती है, और फिर जब श्वास ऊपर से नीचे की और मुड़ती है—इन दो मोड़ों के द्वारा उपलब्ध हो। थोड़े फर्क के साथ यह वही विधि है; और अब अंतराल पर न होकर … Continue reading
तंत्र-सूत्र–विधि—01
शिव कहते है: हे देवी, यह अनुभव दो श्वासों के बीच घटित हो सकता है। श्वास के भीतर आने के पश्चात और बाहर लौटने के ठीक पूर्व– श्रेयस् है, कल्याण है। आरंभ की नौ विधियां श्वास-क्रिया से संबंध रखती है। … Continue reading
विज्ञान भैरव तंत्र—ओशो
विज्ञान भैरव तंत्र—ओशो विज्ञान भैरव तंत्र का जगत बौद्धिक नहीं है। वह दार्शनिक भी नहीं है। तंत्र शब्द का अर्थ है। विधि, उपाय, मार्ग। इस लिए यह एक वैज्ञानिक ग्रंथ है। विज्ञान ‘’क्यों‘’ की नहीं, ‘’कैसे’’ की फिक्र करता है। … Continue reading
कूर्म-नाड़ी पर संयम संपन्न करने से योगी पूर्ण रूप से थिर हो जाता है—पतंजलि
कूर्मनाडयां स्थैर्यम्– कूर्म-नाड़ी प्राण की, श्वास की वाहिका है। अगर हम चुपचाप, शांतिपूर्वक अपने श्वसन पर ध्यान दें, किसी भी ढंग से श्वास की लय न बिगड़े, न तो स्वास तेज हो, और न ही धीमी हो, बस उसे स्वाभाविक … Continue reading
कंठ पर संयम संपन्न करने से क्षुधानु पिपासा की अनुभूतियां क्षीण हो जाती है—पतंजलि
कण्ठ कूपे क्षुत्पिपासानिवृति: यह आंतरिक अन्वेषण है। योग जानता है कि अगर हमको भूख लगती है तो भूख पेट में ही अनुभव नहीं होती है। जब प्यास लगती है, तो वह ठीक-ठीक गले में ही अनुभव नहीं होती। पेट मस्तिष्क … Continue reading
मृत्यु की ठीक-ठीक भविष्य वाणी—पतंजलि
’सक्रिय व निष्क्रिय या लक्षणात्मक वह विलक्षणात्मक—इन दो प्रकार के कर्मों पर संयम पा लेने के बाद मृत्यु की ठीक-ठीक घड़ी की भविष्य सूचना पायी जा सकती है।‘’ सोपक्रमं निरूपक्रमं च कर्म तत्संयमादपारान्तज्ञानमरिष्टेभये वा। तो इसे दो प्रकार से जाना … Continue reading
पोनी एक कुत्ते की आत्म कथा-(अध्याय—15)
जंगल में गीदड़ों नं घेरा– कल बच्चों के साथ जंगल में घूमने के लिए मैं गया तो मुझे इतना अच्छा लगा। पूरा दिन में उन्हें ख्यालों में खोया रहा। इसी से मुझे लगा की मुझे अगले दिन भी जंगल में … Continue reading
अन्ना कैरेनिना: लियो टॉलस्टॉय (ओशो की प्रिय पुस्तकें)
जीवन के शाश्वत, अबूझ रहस्यों और विरोधाभासों को सुलझाने का एक ललित प्रयास— अन्ना कैरेनिना रशियन समाज की एक संभ्रांत महिला की कहानी है। जो अनैतिक प्रेम संबंध जोड़कर अपने आपको बरबार कर लेती है। इस उपन्यास में टॉलस्टॉय कदम-कदम … Continue reading
स्वार्थ पर संयम संपन्न करने से अन्य ज्ञान से भिन्न पुरूष उपलब्ध होता है—पतंजलि
‘’स्वार्थसंयमात्पुरूश ज्ञानम्– तत: प्रतिभश्रावणवेदनादर्शास्वादवार्ता जायन्ते। पतंजलि कहते है, ‘’स्वार्थ परम ज्ञान ले आता है।‘’ स्वार्थ। स्वार्थी हो जाओ, यही है धर्म का वास्तविक मर्म, यह जानने का प्रयास करो कि तुम्हारा वास्तविक स्वार्थ क्या है। स्वयं को दूसरों से अलग … Continue reading
जरूथुस्त्र–
एक बार पर्शिया का राज विशतस्या, जब युद्ध जीतकर लौट रहा था, तो वह जरथुस्त्र के निवास के निकट जा पहुंचा। उसने इस रहस्यदर्शी संत के दर्शन करने की सोची। राज ने जरथुस्त्र के पास जाकर कहा, ‘’मैं आपके पास … Continue reading
ध्रुवे तद्गतिज्ञानम्—पतंजलि योग सूत्र
ध्रुव-नक्षत्र पर संयम संपन्न करने से तारों-नक्षत्रों की गतिमयता का ज्ञान प्राप्त होता है। और हमारे अंतर-अस्तित्व का ध्रुव तारा कौन सा है? ध्रुव तारा बहुत प्रतीकात्मक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यही समझा जाता है कि ध्रुव तारा ही … Continue reading
शक्तियां है जो मन के बहार होने से प्राप्त होती है, लेकिन ये समाधि के मार्ग पर बाधाएं है—पतंजलि (योग-सूत्र)
ख्याल रहे वे भी शक्तियां है, अगर बाहर की और जाना हो तो—लेकिन अगर भीतर जाना हो ता यहीं शक्तियां बाधाएं बन जाती है। अगर व्यक्ति स्वयं के भीतर जा रहा हो, तो यही शक्तियां बाधा बन जायेगी। जो व्यक्ति … Continue reading
आइंस्टीन का सापेक्षवाद–
ऊर्जा बह्मांड़— आइंस्टीन का प्रसिद्ध कथन है, ‘’ऐसा क्यों है कि मुझे कोई नहीं समझता लेकिन प्रेम सभी करते है? इसका उत्तर भी आइंस्टीन को भली भांति ज्ञात था। कारण है उसका सापेक्षवाद का नियम। ई=एम सी2। उसके समकालीन सर्वाधिक … Continue reading
प्राण उर्जा के पाँच भिन्न-भिन्न रूप है— (ओशो)
योगियों ने कहा है, प्राण उर्जा के पाँच भिन्न-भिन्न रूप, क्रियाएं और उर्जा क्षेत्र होते है। हम तो यहीं कहेंगे कि श्वास कहना पर्याप्त है। हम तो केवल रो ही बातें जानते है—श्वास को बाहर छोड़ना, श्वास को भी तर … Continue reading





