Tag Archives: ओशो

एनेलेक्‍टस ऑफ कन्फ्यूशियस—ओशो की प्रिय पुस्तकें

कन्फूशियस चीन के प्राचीन और प्रसिद्ध दार्शनिकों में से एक है। जैसा कि सभी प्राचीन पौर्वात्‍य व्‍यक्‍तियों के साथ हुआ है, इतिहास में उसके जन्‍म और मृत्‍यु की कोई सुनिश्‍चत तारीख दर्ज नहीं है। जो भी उपलब्‍ध है वह केवल … Continue reading

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दि बुक ऑफ ली तज़ु—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

कन्‍फ्यूशियन दर्शन के बाद, ताओ वाद की बहुत बड़ी दार्शनिक परंपरा है। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में ताओ दर्शन प्रौढ़ हुआ। और तभी से ताओ ग्रंथों में किसी ली तज़ु नाम के रहस्‍यदर्शी का उल्‍लेख पाया जाता है। जी तज़ु … Continue reading

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प्रेम को रिश्‍ता मत बनाओ—उर्मिला मातोंडकर

‘’प्रेम संबंध ऐसी फैटेंसी है जहां आप जिस तरह भी जीना चाहें जी तो सकते है मगर खुश होने के बावजूद आप अंतत: दुःखी ही होते है।‘’ प्रसिद्ध फिल्‍म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ओशो ‘’तथाकथित संबंध बहुत सुंदर और सतरंगी सपनों … Continue reading

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मुल्‍ला नसरूद्दीन कौन था—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

कई देश मुल्‍ला नसरूद्दीन को पैदा करने का दावा करते है। टिर्की में तो उसकी कब्र तक बनी हुई है। और हर साल वहां नसरूद्दीन उत्‍सव मनाया जाता है। उस उत्‍सव में मुल्‍ला जैसी पोशाक पहनकर लोग उसके क़िस्सों को … Continue reading

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ट्रैक्‍टेटस लॉजिको—फिलोसफिकस (ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

विटगेंस्‍टीन ऑस्‍टिया के वियना शहर में एक रईस खानदान में पैदा हुआ। उसके पिता उद्योगपति थे उनके पास धन का अंबार था। अंत: विटगेंस्‍टीन को उसके सात भाई-बहनों के साथ उच्‍च कोटि की शिक्षा मिली। उसकी मां और पिता दोनों … Continue reading

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चंदाभ की आभा—कथा यात्रा (ओशो)

राजगृह में चंदाभ नाम का एक ब्राह्मण रहता था। किसी पूर्व जन्‍म में भगवान कश्‍यप बुद्ध के चैत्‍य में चंदन लगाया करता था। कुछ और बड़ा कृत्‍य नहीं था पीछे। लेकिन बड़े भाव से चंदन लगाया होगा कश्‍यप बुद्ध के … Continue reading

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आत्‍मा का अशरीरी रूप क्‍या होता है ?…………आपस में कोई डायलॉग की भी संभावना होती है ? भाग–3 (ओशो)

प्रश्न–परिचय नहीं हो सकता दो आत्‍माओं का? एक दूसरे की पहचान? ओशो—परिचय की जहां तक बात है, दो प्रेतात्‍माएं भी अगर परिचित होना चाहें तो भी दो व्‍यक्‍तियों में प्रवेश करके ही परिचय हो सकती है। सीधी परिचय नहीं हो … Continue reading

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आत्‍मा का अशरीरी रूप क्‍या होता है ? वह स्‍थिर होती है या विचरण करती है ? अपनी परिचित दूसरी आत्‍माओं को पहचानती कैसे है ? और उस अवस्‍था में आपस में कोई डायलॉग की भी संभावना होती है ? (भाग–भाग–2)

दूसरी बात जब ये व्‍यक्‍तियों में प्रवेश कर जाएं तब ये वाणी का उपयोग कर सकते है। तब संवाद संभव है। इसलिए आज तक पृथ्‍वी पर कोई प्रेत या कोई देव प्रत्‍यक्ष और सीधा कुछ भी संवादित नहीं कर पाया … Continue reading

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आत्‍मा का अशरीरी रूप क्‍या होता है ? वह स्‍थिर होती है या विचरण करती है ? अपनी परिचित दूसरी आत्‍माओं को पहचानती कैसे है ? और उस अवस्‍था में आपस में कोई डायलॉग की भी संभावना होती है ?

ओशो—इस संबंध में दो बातें ख्‍याल में लेनी चाहिए। एक तो स्‍थिरता और गति दोनों ही वह नहीं होती। और इस लिए समझना बहुत कठिन होगा। हमें समझना आसान होता है कि गति न हो, तो स्‍थिरता होगी। स्‍थिरता न … Continue reading

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दो जन्‍मों के बीच क्‍या है(भाग–2)—ओशो

एक्‍सीडेंट भी बिलकुल एक्‍सीडेंट नहीं है। उसकी बात करेंगे। कोई एक्‍सीडेंट बिलकुल एक्‍सीडेंट नहीं है। हमें लगता है, क्‍योंकि हमारी व्‍यवस्‍था के कुछ भीतर नहीं घटित होता। लेकिन कोई दुर्घटना सिर्फ दुर्घटना नहीं है। दुर्घटना भी सकारण है। छह महीने … Continue reading

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दो जन्‍मों के बीच क्‍या है—ओशो

प्रश्‍न’– आत्‍मा जब शरीर छोड़ देती है और दूसरा शरीर धारण नहीं करती है, उस बीच के समयातित अंतराल में जो घटित होता है उसका, तथा जहां वह विचरण करती है उस वातावरण के वर्णन की कोई संभावना हो सकती … Continue reading

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लस्‍ट फॉर लाइफ—विंसेंट वैनगो–(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

यह कहानी है उत्‍तप्‍त भावोन्‍मेष की, सृजन के विवश करनेवाले विस्‍फोट की; प्रसिद्ध डच चित्रकार विंसेंट बैन गो की जो अपनी ही प्रतिभा की आग में जीवन भर जलता रहा और अंतत: उसी में जलकर भस्‍मसात हो गया। अजीब किस्‍मत … Continue reading

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प्रिंसिपिया एथिका—जी. इ. मूर—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

आधुनिक दर्शन शास्‍त्र के विकास में जी. ई मूर का योगदान उतना ही महत्‍वपूर्ण है! जितना कि बर्ट्रेंड रसेल का। उसकी बहुत कम रचनाएं प्रकाशित हुई। और ‘’प्रिंसिपिया एथिका’’ उनमें से सर्वप्रथम और सर्वाधिक प्रसिद्ध किताब है। अंग्रेजी साहित्‍य और … Continue reading

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बीइंग एंड टाईम-मार्टिन हाइडेगर—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

कभी-कभार कोई ऐसी किताब प्रकाशित होती है। जो बुद्धिजीवियों की जमात पर टाइम-बम का काम करती है। पहले तो उसकी अपेक्षा की जाती है लेकिन जैसे-जैसे मत बदलते है वह लोगों का ध्‍यान आकर्षित करने लगती है। ऐसी किताब है … Continue reading

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पुनर्जन्‍म की बात—ओशो

प्रश्‍न—कुछ धर्म पुनर्जन्‍म में विश्‍वास करते है और कुछ नहीं करते। आप अपने बारे में कैसे जान सकते है कि आपने भी जीवन जिया है और पुन: जीएंगे? ओशो—सिद्धांतों में मेरा विश्‍वास नहीं हे। मैं एक साधारण आदमी हूं कोई … Continue reading

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धर्म के नाम पर इतना गोरख धंधा क्‍यों? ( ओशो)

धर्मों के कारण ही। धर्मों का विवाद इतना है, धर्मों की एक दूसरे के साथ इतनी छीना-झपटी है। धर्मों का एक दूसरे के प्रति विद्वेष इतना है कि धर्म-धर्म ही नहीं रहे। उन पर श्रद्धा सिर्फ वे ही कर सकते … Continue reading

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उमर ख्‍याम की रूबाइयां—ओशो की प्रिय पुस्‍तकें

उमर ख्‍याम सुंदरी, शराबी, इश्‍क के बारे में लिखता है। उसे पढ़कर लगता है, यह आदमी बड़े से बड़ा सुखवादी होगा। उसकी कविता का सौंदर्य अद्वितीय है। लेकिन वह आदमी ब्रह्मचारी था। उसने कभी शादी नहीं की, उसका कभी किसी … Continue reading

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लिसन-लिटल मैन—ओशो की प्रिय पुस्‍तकें

ऑर्गोन इंस्टिट्यूट की आर्काइव्‍ज का एक दस्तावेज ‘’लिसन लिटल मैन’’ एक मानवीय पुस्‍तक है, वैज्ञानिक नहीं। यह ऑर्गोन इंस्टिट्यूट के आर्काइव्‍ज के लिए 1945 की गर्मी में लिखी गई थी। इसे प्रकाशित करने का कोई इरादा नहीं था। यह एक … Continue reading

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शिष्‍य का चौथ द्वार खोलना और गुरु कि महाकुंजी— ओशो

प्रश्न–हम अपनी मूर्च्‍छित और अहंकारी अवस्‍था में, सदा गुरु के संपर्क में नहीं होते। लेकिन गुरु क्‍या सदा हमारे संपर्क में होता है? ओशो– तुम्‍हारी चेतना परत मात्र एक है चार परतों में। लेकिन यह तभी संभव है जब तुमने … Continue reading

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दि सूफीज़—ओशो की प्रिय पुस्‍तकें

समुंदर ने पूछा किसी ने कि ‘’तुम नीला रंग क्‍यों पहले हुए हो ? यह तो मातम का रंग है। और तुम निरंतर उबलते क्‍यों रहते हो ? वह कौन सी आग है जो तुम्‍हें उबालती है ? समुंदर ने … Continue reading

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