Category Archives: मेरी कहानियां

अंधा कुत्‍ता–कहानी

सेन्‍ट्रर्ल पार्क का जो एक मात्र पुराना लैम्प था, अब उसकी रोशनी-रोशनी न रह कर मात्र जुगनू की चमक रह गई थी। पर वह अपनी ऐतिहासिकता के कारण वह मात्रा देखने की वस्‍तु बनकर रह गया। उसको देख कर अँग्रेजों … Continue reading

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पृथ्‍वी का दान—(कहानी)

अचानक घर की घंटी के बजने से वहां पर फैली बिखरी शांति के साथ ही अँधेरा भी पल भर के लिए थर-थरा गया। भय के मारे शांति मानों किसी खाली कोने में दूबक गई हो। और शिवा नंद जो अपने … Continue reading

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पीपल की प्‍यास ––(कहानी)

पीपल का वो विशाल वृक्ष जो आज आबादी के घेरे में आ गया हैं। सालों पहले तालाब की शान और गॉव का गौरव हुआ करता था। कैसे अपने नन्‍हें सुकोमल महरून नए निकले पत्तों की छवि तालाब के स्फटिक जल … Continue reading

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मोती—कहानी

रोज की तरह आज भी सूर्य दिन भर की भाग दौड़ और धुल-धमास से भरा अपने घर विश्राम के लिए जाने की तैयारी कर रहा था। जाते-जाते उसे बादलों ने चारो और से घेर लिया था। ताकि वह अपने उपर … Continue reading

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आर्य रेवत—(ऐतिहासिक कहानी)

रेवत स्‍थविर सारि पुत्र को छोटा भाई था। राजगृह के पास एक छोटे से गांव का रहने वाला था। सारि पुत्र और मौद्गल्यायन स्‍थविर बचपन से ही संग साथ खेल और बड़े हुए। दोनों ने ही राजनीति ओर धर्म में … Continue reading

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पटाचारा—( ऐतिहासिक कहानी)

श्रावस्‍ती नगरी के श्रेष्ठी आयु सेन के दो बच्‍चे थे। एक लड़की और एक लड़का जिनके नाम चन्‍द्र बाला और चन्‍द्र देव थे। घर धन-धान्‍य से भरा था। पर नहीं था तो माता-पिता के पास समय, जो बच्‍चों के लिए … Continue reading

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भोला-कहानी

भोला ये केवल एक नाम ही नहीं, उस चलते फिरते शरीर मैं झलकती एक व्‍यक्‍ति के व्यक्तित्व की कोमलता, गरिमा, उसका माधुर्य उसके पोर-पोर से टपकता ही नहीं झरता हुआ आप महसूस कर सकते थे। मनुष्य की मनुष्यता, मनस्विता, महिमा … Continue reading

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गे-युग—कहानी

गाँव की शांति में अचानक तूफ़ान आ गया, कहाँ दबी पड़ी थी यह अशांति जंगली घास की तरह दो बून्द पड़ी नहीं की उग आई। मनुष्य, औरतें, बच्चे ही नहीं, पेड़, पौधे, पशु-पक्षी सभी आश्चर्य और शौक मे भर गये … Continue reading

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तालाब–कहानी

शहर के गांव ही नहीं खत्‍म हो रहे है, उनकी नशों में बहने वाली जीवन वाहिन जल के स्‍त्रोत तालाब भी खत्‍म होते जा रहे है, जो आने वाले युग के लिए बहुत धातक है। नीचे भुगर्विय जल धीर-धीरे कम होता जा रहा है, क्‍यों बरसाती पानी पक्‍की होती सडको से जमीन के अंदर रिस नही पाता। जीवन जल से ही है हम भुलते जा रहा है……..
मनसा आनंद Continue reading

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पोकर–कहानी

कहानी आजादी के कुछ गमनाम शहीदों की……. Continue reading

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चूलसुभद्या—(ऐतिहासिक कहानी)

सूर्य के आगमन से पहले उसके पद-चिह्न, आकाश में बादलों के छिटकते टुकड़े के रूप में श्यामल से नारंगी होते दिखाई दे रहे थे। सुबह ने अल साई सी अंगड़ाई ली, पेड़-पौधों में नई जीवंतता का संचार हुआ। कली‍, फूल, … Continue reading

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अंगुलि माल—(ऐतिहासिक कहानी)

तक्ष शिला विद्यालय का प्रांगण, संध्‍या की बेला थी। सूर्य प्राचीर की उतंग पहाड़ियों के पीछे छिपने के लिए ललाईत था। मानो दिन भर की इस धुल-धमास और भाग दोड के बाद वि‍श्राम के लिए आपने घर जा रहा हो। … Continue reading

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सुंदरी परिव्राजिका—(ऐतिहासिक कहानी)

गरीब ब्राह्मण सोम मित्र की कुटिया के आँगन में, अपनी पाँच वर्ष की लड़की को गोद में लिए बहार बैठा है। अंदर उसकी पत्‍नी को प्रसव पीडा तीन दिन से छटपटाती रही है। अंदर, एक शंश्‍य है ओर बहार ब्राह्मण … Continue reading

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बचपन-कहानी

राम शरण भोर में सुबह तीन बजे अलार्म की आवाज़ सुनता, लगता कहीं कोसों दूर से बहती आती ध्वनि मिट्टी हुए शरीर को प्राणों से भर रही है। शरीर का अंग-अंग, पोर-पोर कैसे टूटा बिखरा पड़ा होता, कितनी मुश्किल से … Continue reading

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बाँझ–कहानी

घर क्‍या था, एक भूतीय बंगला ही समझो। घर बनता है परिवार से, बच्‍चो की किलकारीयों से, इतनी बड़ी हवेली नुमा मकान जिसमें पाणी के नाम पर एक बूढ़ी अम्‍मा रहती थी। ऊंची अटालिका , जाली दार महराबी । बरांडा … Continue reading

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नीम का दर्द–कहानी

नीम का दर्द नीम के उस पेड़ को अपनी विशालता, भव्‍यता, विराटता और सौन्द्रय पर बहुत गर्व था। गर्व हो भी क्‍यों न प्रत्‍येक प्राणी उसे देख गद-गद हो जाते थे, पक्षी उसपर अटखेलियॉं कर कैसे मधुर किलकारियाँ मार टहनियों … Continue reading

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फूल वाला –कहानी

प्रिय मित्रो, ये कहानी अभी पिछले महीने ”ज्राहनवी” राष्‍ट्रभाषा विशेषांक सितम्‍बर में प्रकाशित हुई है।
स्‍वामी आनंद प्रसाद मनसा Continue reading

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