Category Archives: मार्ग की मधुर अनुभूतियां—

गाड़रवाड़ा—एक परिक्रमा—(भाग–1)

मुल्‍ला जी—(आनंद मोहम्‍मद) मुल्‍ला जी, हां ये नाम सुन का आप भी जरूर थोड़ा चोंकोगे। मैं भी उसे देख कर थोड़ी दे के लिए अवाक सा रह गया। मन पर चल रहा विचारों का शोर थोड़ी देर के लिए थम … Continue reading

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ध्‍यान में प्रथम अनुभूति–स्‍वामी आनंद प्रसाद

ध्‍यान के प्रथम कदम मनुष्‍य के एक नर्म मुलायम मिट्टी पर पड़ें कदमों की तरह होते है जो बहुत गहरी छाप छोड़ जाते है। फिर आप उसमें श्रद्धा की गुड़ाई की हो तो सोने पे सुहागा समझो। अगर उस भूमि … Continue reading

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सेक्‍स और तंत्र —2

उसके बाद तो मैंने और मां ध्‍यान निर्वाह ने मिल कर बहुत गहरे प्रयोग किये। कितनी ही रातों हम दोनों एक दूसरे के साथ निर्वस्त्र सोये। मेरा तो ध्‍यान धीरे-धीरे गहरा और परिपक्‍व हो रहा था। पर उसे कभी-कभार सेक्‍स … Continue reading

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सेक्‍स और तंत्र—I

(मेरी सेक्‍स के पार की यात्रा) जीवन में जो भी हम आज पाते है, वो कल बीज रूप में हमारा ही बोया हुआ होता है। पर समय के अंतराल के कारण हम दोनों में तारतम्यता नहीं जोड़ पाते और कहते … Continue reading

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