Category Archives: मधुर यादे ओशो के संग..

यारी मेरी यार की (ओशो)–(सुख राज) भाग-3

सुखराज ओशो के बाल सखा कहानी कहानी अब नर्मदा के पात्र की तरह गहरी हो चली थी: इसके बाद फौरन पैंतरा बदलकर ओशो कहते है मैं जाता हूं। तू भी मेरे साथ चल। मैंने कहा, आपकी छोटी गाड़ी है, पहले … Continue reading

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यारी मेरी यार की (ओशो)–(सुख राज) भाग–2

सुखराज भारती की यादें.. एक बार रजनीश बोले, ‘’यार सुखराज, अपन तो ऊब गये है यहां रहते-रहते। अपन तो चलें कहीं और। ये कहां की झंझट में पड़े है, रोज खाना खाओ, पानी पीओ, यह करो, वह करो।‘’ सुखराज जी … Continue reading

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यारी मेरी यार की—(ओशो) सुखराज

(सुख राज–ओशो के बाल सखा ) ओशो कम्‍यून के बुद्ध कक्ष में हजारों लोग बैठे है, उस भरी सभा में ओशो कह रहे है, ‘’मेरा बचपन का दोस्‍त सुख राज यहां बैठा हुआ है। हमारी दोस्‍ती इतनी पुरानी है कि … Continue reading

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