Category Archives: प्रशन चर्चा

दो जन्‍मों के बीच क्‍या है—ओशो

प्रश्‍न’– आत्‍मा जब शरीर छोड़ देती है और दूसरा शरीर धारण नहीं करती है, उस बीच के समयातित अंतराल में जो घटित होता है उसका, तथा जहां वह विचरण करती है उस वातावरण के वर्णन की कोई संभावना हो सकती … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged , | 1 टिप्पणी

पुनर्जन्‍म की बात—ओशो

प्रश्‍न—कुछ धर्म पुनर्जन्‍म में विश्‍वास करते है और कुछ नहीं करते। आप अपने बारे में कैसे जान सकते है कि आपने भी जीवन जिया है और पुन: जीएंगे? ओशो—सिद्धांतों में मेरा विश्‍वास नहीं हे। मैं एक साधारण आदमी हूं कोई … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged , | 2s टिप्पणियाँ

धर्म के नाम पर इतना गोरख धंधा क्‍यों? ( ओशो)

धर्मों के कारण ही। धर्मों का विवाद इतना है, धर्मों की एक दूसरे के साथ इतनी छीना-झपटी है। धर्मों का एक दूसरे के प्रति विद्वेष इतना है कि धर्म-धर्म ही नहीं रहे। उन पर श्रद्धा सिर्फ वे ही कर सकते … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged , | 7s टिप्पणियाँ

सूक्ष्‍म शरीर का जगत—ओशो (भाग–3)

प्रश्‍न—क्‍या हम अपने अतीत के जन्‍मों को जान सकते है? ओशो—निश्‍चित ही जान सकते है। लेकिन अभी तो आप इस जन्‍म को भी नहीं जानते है, अतीत के जन्‍मों को जानना तो फिर बहुत कठिन है। निश्‍चित ही मनुष्‍य जान … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged , | 1 टिप्पणी

सूक्ष्‍म शरीर का जगत—ओशो (भाग–2)

प्रश्‍न– एक और मित्र ने पूछा है, आत्‍मा शरीर के बाहर चली जाए, तो क्‍या दूसरे शरीर में भी प्रवेश कर सकती है? ओशो—कर सकती है। लेकिन दूसरे मृत शरीर में प्रवेश करने का कोई अर्थ और प्रयोजन नहीं रह … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged , | 1 टिप्पणी

सूक्ष्‍म शरीर का जगत—ओशो (भाग–1)

प्रश्‍न–एक मित्र ने पूछा है कि यदि मां के पेट में, पुरूष और स्‍त्री, आत्‍मा के जन्‍मनें के लिए अवसर पैदा करते है, तो इसका अर्थ यह हुआ कि आत्‍माएं अलग-अलग है और सर्वव्‍यापी आत्‍मा नहीं है? उन्होंने यह भी … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged , | 1 टिप्पणी

मात्र एक प्रश्न:

1. मनुष्‍य संध्‍या समय क्यों शराब पीना चाहता है? ये प्रश्‍न मेरे अंतस से उठी एक जिज्ञासा अभीप्सा है। और में प्रत्‍येक मित्र से चाहता हूं, इसका उत्‍तर दे। क्‍योंकि इसका उत्‍तर जीवन में है, जीने की कला में है, … Continue reading

Posted in पोनी--एक आत्‍म कथा, प्रशन चर्चा | Tagged | 6s टिप्पणियाँ

भौतिक समृद्धि ओर आध्‍यात्‍मिक खोज–

क्‍या भौतिक समृद्धि के साथ-साथ अध्‍यात्‍मिक खोज नहीं चल सकती? दोनों में कोई भी विरोध नहीं है। आध्‍यात्‍मिक विकास और भौतिक समृद्धि साथ-साथ चल सकते है। बस एक बात याद रखनी चाहिए कि भौतिक समृद्धि दास बनी रहे और आध्‍यात्‍मिक … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | 1 टिप्पणी

मैंने स्‍वयं को भगवान घोषित क्‍या किया?

मुझे रोज पत्र आते है। मेरे खिलाफ रोज अखबारों में लेख निकलते हैं—सारी दुनियां के कोने-कोने में। उन सारे विरोधों में जो सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण विरोध है, वे विचारणीय है। एक विरोध यह है कि मैंने स्‍वयं को भगवान घोषित क्‍यों … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | 2s टिप्पणियाँ

जर्मन राजकुमार विमल कीर्ति का बुद्धत्‍व—

अभी कुछ दिन पहले मेरा जर्मन संन्‍यासी,विमल कीर्ति, संसार से विदा हुआ। उसने अपनी आखिरी कविता जो मेरे लिए लिखी, उसमें कुछ प्‍यारे वचन लिखे थे। विमल कीर्ति यूं तो राज परिवार से था। करीब-करीब यूरोप के सारे राज परिवारों … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | Leave a comment

विजय आनंद(मशहूर ऐक्टर डायरेक्टर) का संन्‍यास त्‍याग—

अभी कुछ दिन पहले मेरे एक पुराने संन्‍यासी—भूतपूर्व संन्‍यासी—विजय आनंद, कृष्‍ण प्रेम को मिल गये महाबालेश्वर में। कृष्‍ण प्रेम से बोले कि मैंने भगवान को पूर्ण समर्पण कर दिया था। पाँच साल तक संपूर्ण समर्पण रखा। लेकिन जब मुझे बुद्धत्‍व … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | 1 टिप्पणी

कैंसर जैसी बीमारी एक नया अवसर देती है—

प्‍यारे ओशो, कुछ महीने पहले मुझे पता चला कि मेरे यूटरस में कैंसर है। यह मेरे लिए निर्णय का समय था कि मैं पीड़ा भेागूं और मर जाऊं। यह उससे बहार आऊं। मैंने आपको पूरी तरह से अपने ह्रदय में … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | 4s टिप्पणियाँ

बुद्ध के पुनर्जन्‍म का रहस्‍य—

यह जरा कठिन बात है। इसलिए मैंने कल छोड़ दिया था, क्‍योंकि इसकी लंबी ही बात करनी पड़ेगी, लेकिन फिर भी थोड़े में समझ लें। सातवें शरीर के बाद वापिस लौटना संभव नहीं है। सातवें शरीर की उपलब्‍धि के बाद … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | 2s टिप्पणियाँ

क्‍या आप फिर से एक और जन्‍म ले सकते है?

हां, एक बार मैंने कहा था कि यदि इसकी आवश्‍यकता हुई तो मैं आऊँगा वापस। लेकिन अब मैं कहता हूं कि ऐसा असंभव है। अंत: कृपा करना, थोड़ी जल्दी करना। मेरे फिर से आने की प्रतीक्षा मत करना। मैं यहां … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | 3s टिप्पणियाँ

बुद्धों के शरीर से–काम वासना कैसे तिरोहित हो जाती है?(2)

भोजन तिरोहित नहीं हो जाएगा; बुद्ध को भी आवश्‍यकता होगी भोजन की, क्‍योंकि यह एक निजी आवश्‍यकता है। कोई सामाजिक आवश्‍यकता नहीं है। कोई जातिगत आवश्‍यकता नहीं है। निद्रा तिरोहित नहीं होगी, वह एक व्‍यक्‍तिगत आवश्‍यकता है। वह सब जो … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | 3s टिप्पणियाँ

बुद्धों के शरीर से–काम वासना कैसे तिरोहित हो जाती है?

बहुत सारी चीजें समझने जैसी है। पहली: कामवासना भोजन की भांति कोई सामान्‍य जरूरत नहीं है। वह बहुत असामान्‍य होती है। यदि भोजन तुम्‍हें नहीं दिया जाता है तो तुम मर जाओगे, लेकिन बिना काम वासना के तुम जी सकते … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | 2s टिप्पणियाँ

सात शरीर ओर सात चक्र–(6)

छठवाँ शरीर—आज्ञा चक्र— छठवाँ शरीर ब्रह्म शरीर है, काज़मिक बॉडी है; और छठवाँ केंद्र आज्ञा चक्र है। अब यहां से कोई द्वैत नहीं है। आनंद का अनुभव पांचवें शरीर पर प्रगाढ़ होगा। अस्‍तित्‍व का अनुभव छठवें शरीर पर प्रगाढ़ होगा—एग्‍ज़िसटैंस … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | Leave a comment

सात शरीर और सात चक्र—(5)

पाँचवाँ शरीर—विशुद्ध चक्र पांचवां चक्र है विशुद्ध; यह कंठ के पास है। और पांचवां शरीर है स्‍पिरिचुअल बॉडी—आत्‍म शरीर है। विशुद्ध उसका चक्र है। वह उस शरीर से संबंधित है। अब तक जो चार शरीर की मैंने बात कहीं। और … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | Leave a comment

सात शरीर और सात चक्र—(4)

चौथा शरीर—अनाहत चक्र चौथा शरीर है; यह ह्रदय के पास है, हमारा मेंटल बॉडी, मनस शरीर—साइक। इस चौथे शरीर के साथ हमारे चौथे चक्र का संबंध है अनाहत का। चौथा जो शरीर है, मनस इस शरीर का जो प्राकृतिक रूप … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | Leave a comment

तीसरा शरीर—मणिपूर चक्र (3)

तीसरा चक्र; यह नाभि से थोड़ा उपर, जहां कोड़ी होती है। मैंने कहां, एस्‍ट्रल बॉडी है, सूक्ष्‍म शरीर है। उस सूक्ष्म शरीर के भी दो हिस्‍से है। प्राथमिक रूप से सूक्ष्‍म शरीर संदेह,विचार, इनके आसपास रुका रहता है। और अगर,ये … Continue reading

Posted in प्रशन चर्चा | Tagged | Leave a comment