Category Archives: प्रशन चर्चा

सामाजिक तल पर भारत बड़ा कठोर है—ओशो

प्रश्न—भारतीय संस्‍कृति बड़ी सहिष्‍णु संस्‍कृति रही है। बुद्ध ईश्‍वर को नहीं मानते थे, पतंजलि ने भी ईश्‍वर को इंकार कर दिया था। जब आप अमेरिका में पाँच वर्ष रहे, तब क्‍या आपने इस फर्क को देखा? ओशो—मैंने फर्क देखा है। … Continue reading

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स्त्री पहली बार चरित्रवान हो रही है—ओशो

ओशो—तुम्‍हारे चरित्र का एक ही अर्थ होता है, बस कि स्‍त्री पुरूष से बंधी रहे, चाहे पुरूष कैसा ही गलत हो। हमारे शास्‍त्रों में इसकी बड़ी प्रशंसा की गई है। कि अगर कोई पत्‍नी अपने पति को—बूढ़े, मरते, सड़ते, कुष्‍ठ … Continue reading

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दांपत्‍य जीवन अशांत क्‍यों ?–ओशो

ओशो—एक बच्‍चा अपनी मां को प्रेम करता है। और मां खुश होगी कि बच्‍चा मा को प्रेम करता है। और वह बच्‍चे को कितना प्रेम करती है, लेकिन बच्‍चे के मन में मां के प्रेम की जो तस्‍वीर बनती चली … Continue reading

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सेक्‍स से मुक्‍ति: सत्‍यम शिवम् सुंदरम्

प्रश्‍न—किसी ने ओशो से पूछा कि वह सेक्‍स से थक गया है। ओशो—सेक्‍स थकान लाता है। इसलिए मैं तुमसे कहता हूं कि इसकी अवहेलना मत करो। जब तक तुम इसके पागलपन को नहीं जान लेते, तुम इससे छुटकारा नहीं पा … Continue reading

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सेक्‍स और भोजन का गहरा संबंध–ओशो

प्रश्न—मेरे बदन में बहुत काम-ऊर्जा है। जब मैं नाचती हूं, कभी-कभी में महसूस करती हूं कि मैं पूरी दुनिया को खत्‍म कर दूंगी और किसी स्‍थिति में इतना क्रोध और हिंसा मेरे भीतर उबलती है कि मैं अपनी ऊर्जा को … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो—( 10 ) ओशो

एक मात्र विकल्‍प: एक विश्‍व सरकार (अमेरिका में तथा विश्व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो—( 9 ) ओशो

गरीबी : जिम्‍मेदार कौन (अमेरिका में तथा विश्व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो–[8}—ओशो

मरने की स्‍वतंत्रता होनी चाहिए– (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो——7 ओशो

देश और धर्म: झूठी लकीरें—ओशो (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु हो——6 (ओशो)

अपनी खोज आप करो—ओशो (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग … Continue reading

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कोई तो अमीरों का भी गुरु हो? भाग–5 (—ओशो)

मेरा कोई जीवन-दर्शन नहीं है–ओशो (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक … Continue reading

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कोई तो अमीरों का भी गुरु हो? भाग–4 (—ओशो)

सारा विश्‍व एक पागलखाना बना हुआ है—ओशो   (अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि … Continue reading

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कोई तो अमीरों का गुरु—भाग–3 (ओशो)

(अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग ही प्रकाशित हुआ है।) … Continue reading

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कोई तो अमीरों का भी गुरु हो? भाग–2 (—ओशो)

(अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग ही प्रकाशित हुआ है।) … Continue reading

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कोई तो अमीरों का भी गुरु हो?—ओशो

(अमेरिका में तथा विश्‍व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्‍व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्‍ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्‍ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग ही प्रकाशित हुआ है।) … Continue reading

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भारतीय संसद मंद बुद्धि है—ओशो

संसद की छवि गर्व करने लायक नहीं है: –अटल बिहारी वाजपेयी (प्रधानमंत्री ने का कि जनमानस में सदन की जो तस्‍वीर उभर रही है। वह ऐसी नहीं है जिस पर सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते गर्व किया जा सके। … Continue reading

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आत्‍मा का अशरीरी रूप क्‍या होता है ?…………आपस में कोई डायलॉग की भी संभावना होती है ? भाग–3 (ओशो)

प्रश्न–परिचय नहीं हो सकता दो आत्‍माओं का? एक दूसरे की पहचान? ओशो—परिचय की जहां तक बात है, दो प्रेतात्‍माएं भी अगर परिचित होना चाहें तो भी दो व्‍यक्‍तियों में प्रवेश करके ही परिचय हो सकती है। सीधी परिचय नहीं हो … Continue reading

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आत्‍मा का अशरीरी रूप क्‍या होता है ? वह स्‍थिर होती है या विचरण करती है ? अपनी परिचित दूसरी आत्‍माओं को पहचानती कैसे है ? और उस अवस्‍था में आपस में कोई डायलॉग की भी संभावना होती है ? (भाग–भाग–2)

दूसरी बात जब ये व्‍यक्‍तियों में प्रवेश कर जाएं तब ये वाणी का उपयोग कर सकते है। तब संवाद संभव है। इसलिए आज तक पृथ्‍वी पर कोई प्रेत या कोई देव प्रत्‍यक्ष और सीधा कुछ भी संवादित नहीं कर पाया … Continue reading

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आत्‍मा का अशरीरी रूप क्‍या होता है ? वह स्‍थिर होती है या विचरण करती है ? अपनी परिचित दूसरी आत्‍माओं को पहचानती कैसे है ? और उस अवस्‍था में आपस में कोई डायलॉग की भी संभावना होती है ?

ओशो—इस संबंध में दो बातें ख्‍याल में लेनी चाहिए। एक तो स्‍थिरता और गति दोनों ही वह नहीं होती। और इस लिए समझना बहुत कठिन होगा। हमें समझना आसान होता है कि गति न हो, तो स्‍थिरता होगी। स्‍थिरता न … Continue reading

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दो जन्‍मों के बीच क्‍या है(भाग–2)—ओशो

एक्‍सीडेंट भी बिलकुल एक्‍सीडेंट नहीं है। उसकी बात करेंगे। कोई एक्‍सीडेंट बिलकुल एक्‍सीडेंट नहीं है। हमें लगता है, क्‍योंकि हमारी व्‍यवस्‍था के कुछ भीतर नहीं घटित होता। लेकिन कोई दुर्घटना सिर्फ दुर्घटना नहीं है। दुर्घटना भी सकारण है। छह महीने … Continue reading

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