(फ्री हिन्दी अंग्रेजी ओशे प्रवचन और ई-बुक)http://www.oshoba.org/
आनंद प्रसाद
ओशो की किरण जीवन में जिस दिन से प्रवेश किया, वहीं से जीवन का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ, कितना धन्य भागी हूं ओशो को पा कर उस के लिए शब्द नहीं है मेरे पास.....अभी जीवन में पूर्णिमा का उदय तो नहीं हुआ है। परन्तु क्या दुज का चाँद कम सुदंर होता है। देखे कोई मेरे जीवन में झांक कर। आस्तित्व में सीधा कुछ भी नहीं है...सब वर्तुलाकार है , फिर जीवन उससे भिन्न कैसे हो सकता है।
कुछ अंबर की बात करे,
कुछ धरती का साथ धरे।
कुछ तारों की गूंथे माला,
नित जीवन का एहसास करे।।
-
Blog Stats
- 359,194 hits
श्रेणी
- अमृत कण (63)
- आशो सतसंग (49)
- ईसा मसीह के पश्चात सर्वाधिक विद्रोही व्यक्ति–ओशो (2)
- एक विचार (20)
- ओशे अमरत्व रस (2)
- ओशो (1)
- ओशो की प्रिय पूस्तके– (64)
- ओशो के अमृत पत्र (26)
- कथा–यात्रा (53)
- कुछ तथ्य गत सत्य (25)
- चलों कुछ हंस ले– (6)
- ध्यान (34)
- ध्यान प्रयोग–प्रथम और अन्तिम मुक्ति (15)
- ध्यान सिर्फ एक मिनट— (1)
- पतंजलि का योग सुत्र– (18)
- परिशिष्ट प्रकरण–स्वणिम बचपन (26)
- पोनी–एक आत्म कथा (2)
- पोनी–एक कुत्ते की आत्म कथा (15)
- प्रशन चर्चा (48)
- बचपन की सुनहरी यादे (50)
- भारत एक सनातन यात्रा (41)
- भारत के संत (27)
- मधुर यादे ओशो के संग.. (3)
- मार्ग की मधुर अनुभूतियां— (4)
- मेरी कविताए (71)
- मेरी कहानियां (17)
- मेरी नई कविता.. (17)
- ये क्या कहते है ? (34)
- विज्ञान भैरव तंत्र–भाग-1 (9)
- संभोग से समाधि की और (40)
अभिलेख
Top Rated
-
Recent Posts
- तंत्र-सूत्र—विधि-08
- तंत्र-सूत्र—विधि-07
- तंत्र-सूत्र—विधि-06
- तंत्र-सूत्र—विधि-05
- तंत्र-सूत्र—विधि—04
- तंत्र-सूत्र—विधि—03
- तंत्र-सूत्र—विधि—02
- तंत्र-सूत्र–विधि—01
- विज्ञान भैरव तंत्र—ओशो
- कूर्म-नाड़ी पर संयम संपन्न करने से योगी पूर्ण रूप से थिर हो जाता है—पतंजलि
- कंठ पर संयम संपन्न करने से क्षुधानु पिपासा की अनुभूतियां क्षीण हो जाती है—पतंजलि
- मृत्यु की ठीक-ठीक भविष्य वाणी—पतंजलि
- पोनी एक कुत्ते की आत्म कथा-(अध्याय—15)
- अन्ना कैरेनिना: लियो टॉलस्टॉय (ओशो की प्रिय पुस्तकें)
- स्वार्थ पर संयम संपन्न करने से अन्य ज्ञान से भिन्न पुरूष उपलब्ध होता है—पतंजलि
- जरूथुस्त्र–
- ध्रुवे तद्गतिज्ञानम्—पतंजलि योग सूत्र
- शक्तियां है जो मन के बहार होने से प्राप्त होती है, लेकिन ये समाधि के मार्ग पर बाधाएं है—पतंजलि (योग-सूत्र)
- आइंस्टीन का सापेक्षवाद–
- प्राण उर्जा के पाँच भिन्न-भिन्न रूप है— (ओशो)
-
Top Posts
Category Cloud
अमृत कण आशो सतसंग ईसा मसीह के पश्चात सर्वाधिक विद्रोही व्यक्ति--ओशो एक विचार ओशे अमरत्व रस ओशो ओशो की प्रिय पूस्तके-- ओशो के अमृत पत्र कथा--यात्रा कुछ तथ्य गत सत्य चलों कुछ हंस ले-- ध्यान ध्यान प्रयोग--प्रथम और अन्तिम मुक्ति ध्यान सिर्फ एक मिनट--- पतंजलि का योग सुत्र-- परिशिष्ट प्रकरण--स्वणिम बचपन पोनी--एक आत्म कथा पोनी--एक कुत्ते की आत्म कथा प्रशन चर्चा बचपन की सुनहरी यादे भारत एक सनातन यात्रा भारत के संत मधुर यादे ओशो के संग.. मार्ग की मधुर अनुभूतियां— मेरी कविताए मेरी कहानियां मेरी नई कविता.. ये क्या कहते है ? विज्ञान भैरव तंत्र--भाग-1 संभोग से समाधि की और
Category Archives: पतंजलि का योग सुत्र–
कूर्म-नाड़ी पर संयम संपन्न करने से योगी पूर्ण रूप से थिर हो जाता है—पतंजलि
कूर्मनाडयां स्थैर्यम्– कूर्म-नाड़ी प्राण की, श्वास की वाहिका है। अगर हम चुपचाप, शांतिपूर्वक अपने श्वसन पर ध्यान दें, किसी भी ढंग से श्वास की लय न बिगड़े, न तो स्वास तेज हो, और न ही धीमी हो, बस उसे स्वाभाविक … Continue reading
कंठ पर संयम संपन्न करने से क्षुधानु पिपासा की अनुभूतियां क्षीण हो जाती है—पतंजलि
कण्ठ कूपे क्षुत्पिपासानिवृति: यह आंतरिक अन्वेषण है। योग जानता है कि अगर हमको भूख लगती है तो भूख पेट में ही अनुभव नहीं होती है। जब प्यास लगती है, तो वह ठीक-ठीक गले में ही अनुभव नहीं होती। पेट मस्तिष्क … Continue reading
मृत्यु की ठीक-ठीक भविष्य वाणी—पतंजलि
’सक्रिय व निष्क्रिय या लक्षणात्मक वह विलक्षणात्मक—इन दो प्रकार के कर्मों पर संयम पा लेने के बाद मृत्यु की ठीक-ठीक घड़ी की भविष्य सूचना पायी जा सकती है।‘’ सोपक्रमं निरूपक्रमं च कर्म तत्संयमादपारान्तज्ञानमरिष्टेभये वा। तो इसे दो प्रकार से जाना … Continue reading
स्वार्थ पर संयम संपन्न करने से अन्य ज्ञान से भिन्न पुरूष उपलब्ध होता है—पतंजलि
‘’स्वार्थसंयमात्पुरूश ज्ञानम्– तत: प्रतिभश्रावणवेदनादर्शास्वादवार्ता जायन्ते। पतंजलि कहते है, ‘’स्वार्थ परम ज्ञान ले आता है।‘’ स्वार्थ। स्वार्थी हो जाओ, यही है धर्म का वास्तविक मर्म, यह जानने का प्रयास करो कि तुम्हारा वास्तविक स्वार्थ क्या है। स्वयं को दूसरों से अलग … Continue reading
ध्रुवे तद्गतिज्ञानम्—पतंजलि योग सूत्र
ध्रुव-नक्षत्र पर संयम संपन्न करने से तारों-नक्षत्रों की गतिमयता का ज्ञान प्राप्त होता है। और हमारे अंतर-अस्तित्व का ध्रुव तारा कौन सा है? ध्रुव तारा बहुत प्रतीकात्मक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यही समझा जाता है कि ध्रुव तारा ही … Continue reading
शक्तियां है जो मन के बहार होने से प्राप्त होती है, लेकिन ये समाधि के मार्ग पर बाधाएं है—पतंजलि (योग-सूत्र)
ख्याल रहे वे भी शक्तियां है, अगर बाहर की और जाना हो तो—लेकिन अगर भीतर जाना हो ता यहीं शक्तियां बाधाएं बन जाती है। अगर व्यक्ति स्वयं के भीतर जा रहा हो, तो यही शक्तियां बाधा बन जायेगी। जो व्यक्ति … Continue reading
प्राण उर्जा के पाँच भिन्न-भिन्न रूप है— (ओशो)
योगियों ने कहा है, प्राण उर्जा के पाँच भिन्न-भिन्न रूप, क्रियाएं और उर्जा क्षेत्र होते है। हम तो यहीं कहेंगे कि श्वास कहना पर्याप्त है। हम तो केवल रो ही बातें जानते है—श्वास को बाहर छोड़ना, श्वास को भी तर … Continue reading
शिष्य का चौथ द्वार खोलना और गुरु कि महाकुंजी— ओशो
प्रश्न–हम अपनी मूर्च्छित और अहंकारी अवस्था में, सदा गुरु के संपर्क में नहीं होते। लेकिन गुरु क्या सदा हमारे संपर्क में होता है? ओशो– तुम्हारी चेतना परत मात्र एक है चार परतों में। लेकिन यह तभी संभव है जब तुमने … Continue reading
धर्म और संस्कार—
धर्म तुम्हें संस्कारित करते है। राजनेता तुम्हें संस्कारित करते है। तुम एक संस्कारित चित हो। केवल ध्यान द्वारा संभावना है तुम्हारे मन को अ-संस्कारित करने की। केवल ध्यान ही संस्कारों के पार जाता है। क्यों? क्योंकि प्रत्येक संस्कार विचारों के … Continue reading
कामवासना ओर प्रेम—
कामवासना अंश है प्रेम का, अधिक बड़ी संपूर्णता का। प्रेम उसे सौंदर्य देता है। अन्यथा तो यह सबसे अधिक असुंदर क्रियाओं में से एक है। इसलिए लोग अंधकार में कामवासना की और बढ़ते है। वे स्वयं भी इस क्रिया का … Continue reading
सपनों के पाँच प्रकार—II
चौथे प्रकार के स्वप्न– चौथे प्रकार के स्वप्न जो कि आते है पिछले जन्मों से। वे बहुत विरल नहीं होते है। वे घटते हैं, बहुत बार आते है वे। लेकिन हर चीज तुम्हारे भीतर इतनी गड़बड़ी में है कि तुम … Continue reading
सपनों के पाँच प्रकार—I
पहला प्रकार— पहले प्रकार के स्वप्न तो मात्र कूड़ा करकट होते है। हजारों मनो विश्लेषक बस कूड़े पर कार्य कर रहे है; यह बिलकुल व्यर्थ है। ऐसा होता है क्योंकि सारे दिन में, दिन भर काम करते हुए तुम बहुत-कुड़ा … Continue reading
सादगी भरा व्यक्ति और प्रसन्नता—
एक सादगी भरा व्यक्ति जान लेता है कि प्रसन्नता जीवन का स्वभाव है। प्रसन्न रहने के लिए किन्हीं कारणों की जरूरत नहीं होती। बस तुम प्रसन्न रह सकते हो। केवल इसीलिए कि तुम जीवित हो। जीवन प्रसन्नता है जीवन आनंद … Continue reading
क्या आप फिर से एक और जन्म ले सकते है?
हां, एक बार मैंने कहा था कि यदि इसकी आवश्यकता हुई तो मैं आऊँगा वापस। लेकिन अब मैं कहता हूं कि ऐसा असंभव है। अत: कृपा करना, थोड़ी जल्दी करना। मेरे फिर से आने की प्रतीक्षा मत करना। मैं यहां … Continue reading
चाय का अन्वेषक— बोधिधर्म
एक बौद्ध भिक्षु अपना दैनिक जीवन चाय से आरंभ करता है। उषा काल में, इसके पूर्व कि वह ध्यान करने जाए, वह चाय पीता है। ध्यान कर लेने के उपरांत वह चाय पीता है। और वह इसे बहुत धार्मिक ढंग … Continue reading
अस्तित्व की आधारभूत संरचना—
अब मैं तुम्हें तुम्हारे अस्तित्व की एक परम आधारभूत यौगिक संरचना के बारे में बताता हूं। जैसे कि भौतिकविद सोचते है कि यह सब और कुछ नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉन, विद्युत-उर्जा से निर्मित है। योग की सोच है कि यह सब … Continue reading
सिद्घपुरुष और संबोधी व्यक्ति में भेद—
सिद्ध पुरूष—में वह सारी शक्तियां जिनकी योग बात करता है, और पतंजलि बात करेंगे जिनके बारे में—वे उसे आसानी से उपलब्ध होंगी। वह चमत्कारों से भरा होगा; उसका स्पर्श चमत्कारिक होगा। कोई भी चीज संभव होगी क्योंकि उसके पास निन्यानवे … Continue reading
Posted in पतंजलि का योग सुत्र--
3s टिप्पणियाँ
हंसी कि छ: कोटियां—
भगवान बुद्ध ने एक बार सारिपुत्र से कहां की तुम हंसी पर ध्यान के देखो और मुझे बतलाओ हंसी कितने प्रकार की होती है। सारिपुत्र ने पुरा विवरण बुद्ध भगवान को दिया। सारिपुत्र के पहले और सारिपुत्र के बाद कभी … Continue reading





