(फ्री हिन्दी अंग्रेजी ओशे प्रवचन और ई-बुक)http://www.oshoba.org/
आनंद प्रसाद
ओशो की किरण जीवन में जिस दिन से प्रवेश किया, वहीं से जीवन का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ, कितना धन्य भागी हूं ओशो को पा कर उस के लिए शब्द नहीं है मेरे पास.....अभी जीवन में पूर्णिमा का उदय तो नहीं हुआ है। परन्तु क्या दुज का चाँद कम सुदंर होता है। देखे कोई मेरे जीवन में झांक कर। आस्तित्व में सीधा कुछ भी नहीं है...सब वर्तुलाकार है , फिर जीवन उससे भिन्न कैसे हो सकता है।
कुछ अंबर की बात करे,
कुछ धरती का साथ धरे।
कुछ तारों की गूंथे माला,
नित जीवन का एहसास करे।।
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Category Archives: ध्यान
आदमी की प्रौढ़ता और ध्यान–
आदमी अकेला प्राणी है, जिसको प्रौढ़ होने में बहुत समय लगता है। कुत्ते का बच्चा पैदा होता है; कितनी देर लगती है प्रौढ़ होने में? घोड़े का बच्चा पैदा होता है; कितनी देर लगता है प्रौढ़ होने में? घोड़े का … Continue reading
आलोक—आमंत्रण—
मैं मनुष्य को एक घने अंधकार में देख रहा हूं। जैसे अंधेरी रात में किसी घर की दीया बुझ गया हो। ऐसा ही आज मनुष्य हो गया है। उसमें भीतर कुछ बुझ गया है। पर—जो बुझ गया है, उसे प्रज्वलित … Continue reading
विपश्यना ध्यान की उड़ान—
प्रश्न—प्यारे ओशो, कल प्रथम बार मैंने शिविर में विपश्यना ध्यान किया। इतनी उड़ान अनुभव हुई, कृपया विपश्यना के बारे में प्रकाश डालें। ईश्वर समर्पण। विपश्यना मनुष्य जाति के इतिहास का सर्वाधिक महत्वपूर्ण ध्यान-प्रयोग है। जितने व्यक्ति विपश्यना से बुद्धत्व को … Continue reading
विपस्सना ध्यान की तीन विधियां—ओशो
विपस्सना ध्यान— विपस्सना का अर्थ है: अपनी श्वास का निरीक्षण करना, श्वास को देखना। यह योग या प्राणायाम नहीं है। श्वास को लयबद्ध नहीं बनाना है; उसे धीमी या तेज नहीं करना है। विपस्सना तुम्हारी श्वास को जरा भी नहीं … Continue reading
विश्राम व शांति के सूत्र—ध्यान
इधर मनुष्य के जीवन में निरंतर पीड़ा, दुःख और अशांति बढ़ती गई है। बढ़ती जा रही है। जीवन के रस का अनुभव, आनंद का अनुभव विलीन होता जा रहा है। जैसे एक भारी बोझ पत्थर की तरह हमारे मन और … Continue reading
Posted in ध्यान
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बुद्ध का मौन—
यह बड़ा विरोधाभास है, जिसने न बोलना सीख लिया वही बोलने का हकदार है। जिसने चुप होना जाना, वही पात्र है कि अगर बोले तो सौभाग्य। जिसने चुप होना सीखा लिया, उसको चुप हमने नहीं रहने दिया। कहते है बुद्ध … Continue reading
शराब और ध्यान—
मैंने पिछले दिन कहा, शराब ध्यान में बाधक है; यह आधी ही बात थी। आधी बात तुमसे और कह दूँ, ध्यान भी शराब में बाधक है। शराब पीए तो ध्यान करना मुश्किल होगा,और अगर ध्यान किया तो शराब पीना मुश्किल … Continue reading
अंधे हाथों में विपश्यना के खतरे-(ध्यान)
संसार अब तेजी से ध्यान में उत्सुक हो रहा है। अब इसमें बहुत देर नहीं है कि ध्यान तुम्हारी परम शिक्षा का हिस्सा हो जाये। तुम्हारी साधारण शिक्षा बाहर के बारे में है। ध्यान तुम्हारे भीतर की, तुम्हारे अंतर्तम की … Continue reading
प्रसन्नता और उदासी— सदुउयोग शिवनेत्र के लिए
कभी जब चित बहुत प्रसन्न हो तो द्वार-दरवाजे बंद करके अपने कमरे में लेट जाए, कम से कम वस्त्र हो या नग्न होकर लेटे तो और भी बेहतर होगा। और एक मिनट तक अपने माथे पर हाथ रखकर दोनों आंखों … Continue reading
मन, शरीर और ध्यान
जो हम कर रहे है, वह हम शायद ही मन:पूर्वक करते है। जो हम करते हे, यंत्रवत करते है, मन और हजार काम करता है। जैसे रहा पर चल रहे है— शरीर तो राह पर होता है, मन न मालूम … Continue reading
शराब और ध्यान
शराब का ध्यानियों ने विरोध किया है, क्योंकि शराब परिपूरक है। यह सस्ते में ध्यान की भ्रांति करवा देती है। ध्यानी को भी शराबी जैसा मस्ती में ड़ूबा हुआ पाओगे, और शराब में भी तुम्हें ध्यान की थोड़ी सी गंध … Continue reading
गुंजन—‘’ध्यान’’
गुंजन करना बहुत सहयोगी हो सकता है और इसे आप कभी भी कर सकते हैं। कम से कम दिन में एक बार इसे करें। अगर आप दिन में दो बार कर सकें तो अच्छा होगा। यह इतना अद्भुत अंतर-संगीत है … Continue reading
गीत गाओ—”ध्यान’’
गीत गाना दिव्य है, दिव्यतम घटनाओं में से एक है। केवल नृत्य ही इससे ऊपर है। नृत्य के बाद गायन ही आता है। और नृत्य करना और गीत गाना दिव्य घटनाएं क्यों हैं ? क्योंकि यही वे घटनाएं हैं जिनमें … Continue reading
कभी, अचानक ऐसे हो जाएं जैसे नहीं हैं—
किसी वृक्ष के नीचे बैठे हुए, अतीत और भविष्य के बारे में न सोचते हुए, सिर्फ अभी और यहीं होते हुए, आप कहां है ?‘मैं’ कहां है? आप इस ‘मैं’ को अनुभव नहीं कर सकते, वह इस क्षण में नहीं … Continue reading
शब्दों के बिना देखना—( ध्यान)
छोटी-छोटी चीजों में प्रयोग करें मन बीच में न आए। आप एक फूल को देखते हैं—तब आप सिर्फ देखें। मत कहें ‘सुदंर’, ‘असुंदर’। कुछ मत कहें, शब्दों को बीच में मत लाएं, कोई उपयोग न करें। सिर्फ देखें। मन बड़ा … Continue reading
सिरदर्द को देखना—( ध्यान )
अब जब भी आपको सिरदर्द हो तो एक छोटी सी ध्यान की विधि का प्रयोग करें—सिर्फ प्रयोगात्मक रूप से—बाद में आप बड़ी बीमारियों में और लक्षणों में भी प्रयोग कर सकते है। जब भी आपको सिरदर्द हो, एक छोटा सा … Continue reading
संतुलन ‘’ध्यान’’—2
तिब्बत में एक बहुत छोटी सी विधि है—बैलेंसिंग, संतुलन उस विधि का नाम है। कभी घर में खड़े हो जाएं सुबह स्नान करके, दोनों पैर फैला लें और खयाल करें कि आपके बाएं पैर पर ज्यादा जोर पड़ रहा है। … Continue reading
संतुलन—‘’ध्यान’’
लाआत्से के साधना-सूत्रों में एक गुप्त सूत्र आपको कहता हुँ, जो उसकी किताबों में उल्लिखित नहीं है, लेकिन कानों-कान लाओत्से की परंपरा में चलता रहा है। वह लाओत्से की ध्यान पद्धति का यह है। लाआत्से कहता है कि पालथी मार … Continue reading
सृजन में डूब जाएं—” ध्यान’’
कला एक ध्यान है। कोई भी कार्य ध्यान बन सकता है, यदि हम उसमें डूब जाएं। तो एक तकनीशियन मात्र मत बने रहें। यदि आप केवल एक तकनीशियन हैं तो पेंटिंग कभी ध्यान नहीं बन पाएगी। हमें पेंटिंग में पूरी … Continue reading
कार्य—‘’ध्यान की तरह’’
जब भी आपको लगे कि आपकी मूड अच्छा नहीं है और काम करना अच्छा नहीं लग रहा है, तो काम करने से पहले पाँच मिनट के लिए गहरी श्वास बाहर फेंके। भाव करें कि श्वास के साथ खराब मूड भी … Continue reading





