Category Archives: ध्‍यान प्रयोग–प्रथम और अन्‍तिम मुक्‍ति

तीसरी आँख को विकसित करने लिए कुछ महत्‍वपूर्ण ध्‍यान: ओशो

नासाग्र को देखना (ध्‍यान)—ओशो लाओत्‍से ने कहा: व्‍यक्‍ति नासाग्र की और देखे। क्‍यों—क्‍योंकि इससे मदद मिलती है, यह प्रयोग तुम्‍हें तृतीय नेत्र की रेखा पर ले आता है। जब तुम्‍हारी दोनों आंखें नासाग्र पर केंद्रित होती है तो उससे कई … Continue reading

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तीसरी आँख : स्‍वप्‍न या सत्‍य?—

ध्‍यान के अंतर्यात्रा पर जो भी चल पड़ता है वह अक्‍सर, अध्‍यात्‍म-जगत के गुह्म विज्ञान से बेहद आकर्षित हो जाता है। इससे पहले कि उसके पैर पार्थिव शरीर की भूमि में दृढ़ता से जम जाएं, वह तीसरे-चौथे-पांचवें सूक्ष्‍म शरीरों की … Continue reading

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तीसरी आँख को विकसित करने लिए कुछ महत्‍वपूर्ण ध्‍यान: ओशोओशो

(2) पंख की भांति छूना ध्‍यान —ओशो शिव ने कहा: आँख की पुतलियों को पंख की भांति छूने से उसके बीच का हलका पन ह्रदय में खुलता है। ओशो–अपनी दोनों हथेलियों का उपयोग करो, उन्‍हें अपनी बंद आँखो पर रखो, … Continue reading

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तीसरी आँख को विकसित करने लिए कुछ महत्‍वपूर्ण ध्‍यान:

(1) साक्षी को खोजना—ओशो शिव ने कहा: होश को दोनों भौहों के मध्‍य में लाओ और मन को विचार के समक्ष आने दो। देह को पैर से सिर तक प्राण तत्‍व से भर जाने दो, ओर वहां वह प्रकाश की … Continue reading

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तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है: भाग-2 (ओशो)

तो ये बात बहुत विरोधा भाषी है, लेकिन ऐसा है। यदि कोई स्‍त्री ब्रह्मचर्य धारण करना चाहे और अपने शरीर से पृथक रहना चाहे तो वह यह पुरूष की उपेक्षा अधिक आसानी से कर सकती है। एक बार शरीर से … Continue reading

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तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है: भाग-1 (ओशो)

पहले तो दो बातें समझ लेने की है। एक, तीसरी आँख की ऊर्जा वही है जो ऊर्जा दो सामान्‍य आंखों को चलाती है। ऊर्जा वही है, सिर्फ वह नई दिशा में नए केंद्र की और गति करने लगती है। तीसरी … Continue reading

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ओशो गौरी शंकर ध्‍यान–

निर्देश: इस विधि में पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चरण है। पहले दो चरण साधक को तीसरे चरण में सहज लाती हान के लिए तैयार कर देते है। ओशो ने बताया है कि यदि पहले चरण में श्‍वास-प्रश्‍वास को ठीक से … Continue reading

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प्रार्थना ध्‍यान—ओशो

अच्‍छा हो कि यह प्रार्थना ध्‍यान आप रात में करो। कमरे में अंधकार कर ले। और ध्‍यान खत्‍म होने के तुरंत बाद सो जाओ। या सुबह भी इसे किया जा सकता है, परंतु उसके बाद पंद्रह मिनट का विश्राम जरूर … Continue reading

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सुरक्षा प्रभा मंडल ध्‍यान: (काया कल्‍प करने के लिए)

क्‍या आप जानते है कि सप्ताहांत में आप इतना थक जाते है कि खड़े भी नहीं हो पाते। एक विधि प्रस्‍तुत है—कायाकल्‍प करने के लिए नहीं, अपितु आपकी क्‍लांति को यथासंभव कम करने के लिए। हमारी थकावट के कई कारण … Continue reading

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ओशो–( चक्रा साउंड ध्‍यान)

इस ध्‍यान में चक्रों को लयवद्ध करने व उसके प्रति एक चेतना जाग्रत करने के लिए ध्‍वनियों का उपयोग किया जाता है। स्‍वयं घ्वनियां पैदा करते हुए अथवा केवल संगीत को सुन कर अपने भीतर ध्‍वनियों को महसूस करते हुए, … Continue reading

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सात-सात साल का वर्तुल—(ओशो)

एक से सात साल तक– बच्‍चा बहुत मासूम होता है, बिलकुल संत जैसा। वह अपनी जननेंद्रियों से खेलता है लेकिन उसे पता नहीं होता कि वह गलत है। वह नैसर्गिक ढ़ंग से जीता है।

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ओशो नटराज ध्यान–

ओशो नटराज ध्‍यान– ओशो नटराज ध्‍यान ओशो के निर्देशन में तैयार किए गए संगीत के साथ किया जा सकता है। यह संगीत ऊर्जा गत रूप से ध्‍यान में सहयोगी होता है। और ध्‍यान विधि के हर चरण की शुरूआत को … Continue reading

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ओशो कुंडलिनी ध्‍यान–

ओशो कुंडलिनी ध्‍यान– यह सक्रिय ध्‍यान का अति प्रिय सहयोगी ध्‍यान है। इसमें पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चारण है। यह ध्‍यान ओशो के निर्देशन में तैयार किए गए संगीत के साथ किया जा सकता है। यह संगीत ऊर्जा गत रूप … Continue reading

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ओशो डाइनैमिक ध्‍यान–

ओशो डाइनैमिक ध्‍यान– ओशो डाइनैमिक ध्‍यान ओशो के निर्देशन में तैयार किए गए संगीत के साथ किया जाता है। यह संगीत ऊर्जा गत रूप से ध्‍यान में सहयोगी होता है और ध्‍यान विधि के हर चरण की शुरूआत को इंगित … Continue reading

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ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान—

ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान— नाद ब्रह्म एक प्राचीन तिब्‍बती विधि है जिसे सुबह ब्रह्ममुहूर्त में किया जाता रहा है। अब इसे दिन में किसी भी समय अकेले या अन्‍य लोगों के साथ किया जा सकता है। पेट खाली होना चाहिए … Continue reading

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