Category Archives: ओशो की प्रिय पूस्‍तके–

दि फर्स्‍ट एंड लास्‍ट फ़्रीडम—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

जे. कृष्णामूर्ति यह किताब जे. कृष्णामूर्ति के लेखों का संकलन है। यह उस समय छपी है जब कृष्‍ण मूर्ति आत्म क्रांति से गुजरकर स्‍वतंत्र बुद्ध पुरूष के रूप में स्‍थापित हो चूके थे। लंदन के ‘’विक्‍टर गोलांझ लिमिटेड’’ प्रकाशन ने … Continue reading

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दि बुक—ऐलन वॉटस (ओशो कि प्रिय पुस्‍तकें)

ऑन दि टैबू अगेंस्‍ट नोइग हू यू आर–ऐलन वॉटस किताब में प्रवेश करने से पहले खुद ऐलन वॉटस संक्षेप में इसे लिखने की वजह बताता है। ‘’यह किताब मनुष्‍य के उस निषिद्ध लेकिन अनचीन्‍हें टैबू के संबंध में है जो … Continue reading

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दि गॉस्पल—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

एकॉर्डिंग टू थॉमस– वह दिसंबर का एक भाग्‍य शाली दिन था। सन था 1951 उत्‍तर ईजिप्‍त में एक शहर है नाग हम्‍मदि। उसके आसपास बियाबान में एक अरब किसान अपने खेत के लिए खुदाई कर रहा था। अचानक उसे एक … Continue reading

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एक आदमी पर्वत जैसा: (ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

दि ज़ेन टीचिंग ऑफ हु आंग पो ऑन दि ट्रांसमिशन ऑफ माईड– अंग्रेजी अनुवाद: जॉन ब्‍लोफेल्‍ड हु आंग पो एक मनुष्‍य का नाम था और पर्वत का भी क्‍योंकि हु आंग पो इसी नाम के पर्वत पर रहता था। यह … Continue reading

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रिसरेक्‍शन—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

लियो टॉलस्‍टॉय ‘’रिसरेक्शन’’ टॉलस्‍टॉय का आखिरी उपन्‍यास है। इससे पहले ‘’वार एंड पीस’’ और ऐना कैरेनिना’’ जैसे श्रेष्‍ठ और महाकाय उपन्‍यास लिखकर टॉलस्‍टॉय ने विश्‍व भर में ख्‍याति अर्जित कर ली थी। ऐना कैरेनिना के बारे में उसने खुद कहा … Continue reading

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ब्रदर्स कार्मोझोव—( ओशो की प्रिय पुस्‍तकें )

फ्योदोर दोस्तोव्सकी विश्‍व विख्‍यात रशियन उपन्‍यासकार फ्योदोर दोस्तोव्सकी की श्रेष्‍ठ रचना ब्रदर्स कार्मोझोव ओशो की दृष्‍टि में सर्वश्रेष्‍ठ तीन किताबों में से एक है। यह कहानी है बेइंतहा प्‍यार की, कत्‍ल की और आध्‍यात्‍मिक खोज की। यह कहानी वस्‍तुत: लेखक … Continue reading

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दि विल टु पावर: (ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

फ्रेडरिक नीत्‍से कुछ व्‍यक्‍तियों का वजूद इतना बड़ा होता है कि उनके देश का नाम उनके नाम सक जुड़ जाता है। जैसे ग्रीस सुकरात और प्लेटों की याद दिलाता है। चीन लाओत्से का देश बन गया। वैसे ही जर्मनी फ्रेडरिक … Continue reading

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दि हिस्‍ट्री ऑफ वेस्‍टर्न फिलॉसॉफी—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

बर्ट्रेंड रसेल– इंग्‍लैंड के विश्‍व विख्‍यात दार्शनिक, लेखक बर्ट्रेंड रसेल ने अपरिसीम श्रम करके विचार के विकास की कहानी लिखी है। यह कहानी उसके एक महाकाव्‍य पुस्‍तक में उंडेली है। जिसका नाम है: ‘’दि हिस्‍ट्री ऑफ वेस्‍टर्न फिलॉसॉफी’’ पाश्‍चात्‍य दर्शन … Continue reading

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सायकोसिंथेसिस—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

ए मैन्‍युअल ऑफ प्रिंसिपल्‍स एंड टेकनिक्स—असोजियोली एम. डी. (यद्यपि असोजियोली बुद्ध पुरूष नहीं है, और वह चेतना की परम स्‍थिति का वर्णन नहीं करता, तथापि अंतर् याता की समूची प्रक्रिया को वह अत्‍यंत विधायक दृष्‍टिकोण से और वैज्ञानिक ढंग से … Continue reading

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ओस कण और सागर: (ओशो–ध्‍यान विधि)

(यह विधि इस बात का बोध कराने का एक उपाय है कि हम किस प्रकार स्‍वयं को दूसरों से पृथक करते है। और होश पूर्वक उस पृथकता को विलीन करते है।) कब: प्रात: स्‍नान के पश्‍चात और रात्रि सोने से … Continue reading

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दीवान-ए-गालिब—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

असदल्‍ला खां ग़ालिब: कल हमने दिल्‍ली के ही एक सूफी फकीर सरमद की बात की थी आज भी दिल्‍ली की गलियों में जमा मस्जिद से थोड़ा अंदर की तरफ़ कुच करेंगें बल्‍लिमारन। जहां, महान सूफी शायद मिर्जा गालिब के मुशायरे … Continue reading

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सरमद : भारत का यहूदी संत—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

( सरमद का कत्‍ल कर दिया गया मुगल बादशाह औरंगज़ेब के हुक्‍म से। उसने मुल्‍लाओं के साथ साजिश की थी। लेकिन सरमद हंसता रहा। उसने कहा, मरने के बाद भी मैं यहीं कहूंगा। दिल्‍ली की विशाल जामा मस्‍जिद, जहां सरमद … Continue reading

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लल्‍लवाख—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

लल्‍ला की वाणी: योग मार्ग स्‍त्री-पुरूष, दोनों के लिए समान रूप से उपल्‍बध है। लेकिन न जाने क्‍यों स्‍त्रियां उस मार्ग पर बहुत कम चलीं। और जो चलीं भी, उनमें पहुंचने वाली अत्‍यंत कम है। कश्‍मीरी रहस्‍यदर्शी स्‍त्री लल्‍ला ऐसी … Continue reading

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सायकोएनेलिसिस एंड दि अनकांशस –-ओशो की प्रिय पुस्‍तकें

लेखक—डी. एच. लॉरेन्स बीसवीं सदी के आरंभ में सिगमंड फ्रायड और उसके शिष्‍योत्‍तम युग ने पहली बार मनुष्‍य के मन की गहराई में दबे हुए अवचेतन या अनकांशस का उॅहापोह किया। ओशो स्‍पष्‍ट कहते है कि लॉरेन्‍स एक स्‍थापित मनोवैज्ञानिक … Continue reading

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मदर : ओशो की प्रिय पुस्‍तकें

मदर—मैक्‍सिम गोर्की (विख्‍यात रशियन लेखक मैक्‍सिम गोर्की उपन्‍यास मदर पहली रशियन क्रांति के पहले लिखा गया था जब ज़ार शाही के खिलाफ मजदूरों को उत्‍थान शुरू हुआ। रशिया में नया-नया औधोगिकीकरण हुआ था। शहरों में कारखाने खड़े हुए और उनमें … Continue reading

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दि डेस्‍टिनी ऑफ दि माइंड—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

—विलियम हास बीसवीं सदी के प्रारंभ में अनेक जर्मन तथा यूरोपियन विद्वान पूरब की प्रज्ञा की और आकर्षित हुए। यूरोप में बुद्धिवाद का उत्कर्ष चरम शिखर पर था लेकिन यह बुद्धिवाद तर्क पर आधारित था। वह बुद्धि की संतुष्‍टि तो … Continue reading

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दि फीनिक्स—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

दि फीनिक्स—डी. एच. लॉरेन्स लॉरेन्स इंग्‍लैण्‍ड में 1885 में पैदा हुआ। दुर्भाग्‍य से इस प्रतिभाशाली लेखक को बड़ी छोटी सी जिंदगी मिली। केवल पैंतालीस वर्ष—लेकिन उम्र के इस छोटे से सफर में उसकी सर्जनशीलता जलप्रपात की तरह धुंआधार बहती रही। … Continue reading

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मैक्‍ज़िम्‍स फॉर रिवोल्‍युशनिस्‍ट—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ– जॉर्ज बर्नार्ड शॉ इस सदी का अद्भुत मेधावी और मजाकिया लेखक था। उसका व्‍यक्‍तित्‍व उतना ही रंगबिरंगा था जितनी कि उसकी साहित्‍य-संपदा। उसकी रोजी रोटी कमाने का मूल व्‍यवसाय था। ‘’नाटकों को लेखन।’’ बर्नार्ड शॉ एक साथ … Continue reading

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श्री भाष्‍य–-रामानुज (ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

रामानुज आचार्य रामानुज लिखित श्री भाष्‍य उस युग का प्रतिनिधित्‍व करता है जिस युग में भारत चित पर पांडित्‍य राज करता था। बुद्धत्‍व की अनुभूति तो बहुत तो बहुत संक्षिप्‍त सुत्रों में लिखी जाती है। ठीक वैसे जैसे विज्ञान के … Continue reading

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टशियन ऑर्गेनम—(ओशो कि प्रिय पुस्‍तकें)

टर्शियम ऑगेंनम—डी.पी. ऑस्‍पेन्‍सकी इस पूस्‍तक का लेखक पी.डी ऑस्‍पेन्‍सकी गणितज्ञ ओर तर्कशास्‍त्री, दोनों था। ओर इन दोनों विषयों में उसकी जो पैठ थी उसका इत्र निचोड़कर उसने एक दर्शन खड़ा किया जिसका लोकप्रिय नाम था: चौथा आयाम। उसकेआधार पर उसने … Continue reading

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