(फ्री हिन्दी अंग्रेजी ओशे प्रवचन और ई-बुक)http://www.oshoba.org/
आनंद प्रसाद
ओशो की किरण जीवन में जिस दिन से प्रवेश किया, वहीं से जीवन का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ, कितना धन्य भागी हूं ओशो को पा कर उस के लिए शब्द नहीं है मेरे पास.....अभी जीवन में पूर्णिमा का उदय तो नहीं हुआ है। परन्तु क्या दुज का चाँद कम सुदंर होता है। देखे कोई मेरे जीवन में झांक कर। आस्तित्व में सीधा कुछ भी नहीं है...सब वर्तुलाकार है , फिर जीवन उससे भिन्न कैसे हो सकता है।
कुछ अंबर की बात करे,
कुछ धरती का साथ धरे।
कुछ तारों की गूंथे माला,
नित जीवन का एहसास करे।।
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- आत्मा का अशरीरी रूप क्या होता है ? वह स्थिर होती है या विचरण करती है ? अपनी परिचित दूसरी आत्माओं को पहचानती कैसे है ? और उस अवस्था में आपस में कोई डायलॉग की भी संभावना होती है ?
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Category Archives: ओशो की प्रिय पूस्तके–
एनेलेक्टस ऑफ कन्फ्यूशियस—ओशो की प्रिय पुस्तकें
कन्फूशियस चीन के प्राचीन और प्रसिद्ध दार्शनिकों में से एक है। जैसा कि सभी प्राचीन पौर्वात्य व्यक्तियों के साथ हुआ है, इतिहास में उसके जन्म और मृत्यु की कोई सुनिश्चत तारीख दर्ज नहीं है। जो भी उपलब्ध है वह केवल … Continue reading
दि बुक ऑफ ली तज़ु—(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
कन्फ्यूशियन दर्शन के बाद, ताओ वाद की बहुत बड़ी दार्शनिक परंपरा है। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में ताओ दर्शन प्रौढ़ हुआ। और तभी से ताओ ग्रंथों में किसी ली तज़ु नाम के रहस्यदर्शी का उल्लेख पाया जाता है। जी तज़ु … Continue reading
मुल्ला नसरूद्दीन कौन था—(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
कई देश मुल्ला नसरूद्दीन को पैदा करने का दावा करते है। टिर्की में तो उसकी कब्र तक बनी हुई है। और हर साल वहां नसरूद्दीन उत्सव मनाया जाता है। उस उत्सव में मुल्ला जैसी पोशाक पहनकर लोग उसके क़िस्सों को … Continue reading
ट्रैक्टेटस लॉजिको—फिलोसफिकस (ओशो की प्रिय पुस्तकें)
विटगेंस्टीन ऑस्टिया के वियना शहर में एक रईस खानदान में पैदा हुआ। उसके पिता उद्योगपति थे उनके पास धन का अंबार था। अंत: विटगेंस्टीन को उसके सात भाई-बहनों के साथ उच्च कोटि की शिक्षा मिली। उसकी मां और पिता दोनों … Continue reading
लस्ट फॉर लाइफ—विंसेंट वैनगो–(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
यह कहानी है उत्तप्त भावोन्मेष की, सृजन के विवश करनेवाले विस्फोट की; प्रसिद्ध डच चित्रकार विंसेंट बैन गो की जो अपनी ही प्रतिभा की आग में जीवन भर जलता रहा और अंतत: उसी में जलकर भस्मसात हो गया। अजीब किस्मत … Continue reading
प्रिंसिपिया एथिका—जी. इ. मूर—(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
आधुनिक दर्शन शास्त्र के विकास में जी. ई मूर का योगदान उतना ही महत्वपूर्ण है! जितना कि बर्ट्रेंड रसेल का। उसकी बहुत कम रचनाएं प्रकाशित हुई। और ‘’प्रिंसिपिया एथिका’’ उनमें से सर्वप्रथम और सर्वाधिक प्रसिद्ध किताब है। अंग्रेजी साहित्य और … Continue reading
बीइंग एंड टाईम-मार्टिन हाइडेगर—(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
कभी-कभार कोई ऐसी किताब प्रकाशित होती है। जो बुद्धिजीवियों की जमात पर टाइम-बम का काम करती है। पहले तो उसकी अपेक्षा की जाती है लेकिन जैसे-जैसे मत बदलते है वह लोगों का ध्यान आकर्षित करने लगती है। ऐसी किताब है … Continue reading
उमर ख्याम की रूबाइयां—ओशो की प्रिय पुस्तकें
उमर ख्याम सुंदरी, शराबी, इश्क के बारे में लिखता है। उसे पढ़कर लगता है, यह आदमी बड़े से बड़ा सुखवादी होगा। उसकी कविता का सौंदर्य अद्वितीय है। लेकिन वह आदमी ब्रह्मचारी था। उसने कभी शादी नहीं की, उसका कभी किसी … Continue reading
लिसन-लिटल मैन—ओशो की प्रिय पुस्तकें
ऑर्गोन इंस्टिट्यूट की आर्काइव्ज का एक दस्तावेज ‘’लिसन लिटल मैन’’ एक मानवीय पुस्तक है, वैज्ञानिक नहीं। यह ऑर्गोन इंस्टिट्यूट के आर्काइव्ज के लिए 1945 की गर्मी में लिखी गई थी। इसे प्रकाशित करने का कोई इरादा नहीं था। यह एक … Continue reading
दि सूफीज़—ओशो की प्रिय पुस्तकें
समुंदर ने पूछा किसी ने कि ‘’तुम नीला रंग क्यों पहले हुए हो ? यह तो मातम का रंग है। और तुम निरंतर उबलते क्यों रहते हो ? वह कौन सी आग है जो तुम्हें उबालती है ? समुंदर ने … Continue reading
बालशेम तोव—(हसीद दर्शन) ओशो की प्रिय पुस्तकें
हसीद की धारा कुछ चंद रहस्यदर्शीयों की रहस्यपूर्ण गहराइयों से पैदा हुई है। बालशेम उनमें सबसे प्रमुख है। हमीद पंथ का जा भी दर्शन है वह शाब्दिक नहीं है, बल्कि उसके रहस्यदर्शीयों के जीवन में, उनके आचरण में प्रतिबिंबित होता … Continue reading
ऐलन वॉटस –‘’दि वे ऑफ झेन’’—(ओशो की प्रिय किताबें)
आध्यात्मिक अनुभवों का सौंदर्य यह है कि उनके घटने से विश्व की और देखने का नजरिया बदल जाता है। विश्व एक समस्या नहीं रहता। उल्टे ऐसा लगता है कि जो भी है बिलकुल ठीक है, इससे अन्यथा हो ही नहीं … Continue reading
दि साइकोलाजी ऑफ-मैन्स पॉसिबल इवोलुशन—(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
पी. डी. ओस्पेंस्की– (मनुष्य का संभावित विकास) पी. डी. ओस्पेंस्की बीसवीं सदी के विख्यात रहस्यदर्शी गुरजिएफ का प्रधान शिष्य था। वह अत्यंत विद्वान और प्रतिभाशाली तो था ही, उसे शब्दों की बादशाहत भी हासिल थी। उसने आध्यात्मिक जगत की खोजों … Continue reading
माय ऐक्सपैरिमैंट विद दि टूथ(महात्मा गांधी)—ओशो की प्रिय पुस्तकें
आज में जिस किताब का जिक्र करने जा रहा हूं, उसके बारे में किसी ने सोचा नहीं होगा कि मैं बोलूगा। वह है: महात्मा गांधी की आत्मकथा। माय ऐक्सपैरिमैंट विथ टूथ। सत्य को लेकिर उनके प्रयोगों के विषय में बात … Continue reading
दि आऊटसाइडर: ओशो की प्रिय पुस्तकें
(अजनबी)—कॉलिन विलसन (प्रसिद्ध लेखक एच. जी. वेल्स भी एक अजनबी है। वह स्वयं को ‘’अंधों के देश में आँखवाला आदमी’’ कहता है। सोरेन किर्कगार्ड एक गहरा आध्यात्मिक दार्शनिक था। ‘’अस्तित्ववाद’’ उसी ने प्रचलित की हुई संज्ञा है। उसने तर्क और … Continue reading
ए न्यू मॉडल ऑफ दि यूनिवर्स—(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
पी. डी. ऑस्पेन्सकी एक रशियन गणितज्ञ और रहस्यवादी था। उसे रहस्यदर्शी तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन रहस्य का खोजी जरूर था। विज्ञान अध्यात्म, गुह्म विद्या, इन सबमें उसकी एक साथ गहरी पैठ थी। इस अद्भुत प्रतिभाशाली लेखक ने पूरी … Continue reading
एट दि फीट ऑफ दि मास्टर—(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
जे. कृष्ण मूर्ति—कि तीसरी किताब यह किताब गागर में सागर है। इतनी छोटी है कि उसे किताब कहने में झिझक होती हे। चार इंच चौड़ी और पाँच इंच लंबी इस लधु पुस्तक के सिर्फ 46 पृष्ठों में पूरा ज्ञान सम्माहित … Continue reading
कमेंटरीज़ ऑन लिविंग: (ओशो की प्रिय पुस्तकें)
जे. कृष्ण मूर्ति जे कृष्ण मूर्ति की बेहद खूबसूरत किताब, ‘’कमेंटरीज़ ऑन लिविंग’ एक निर्मल झील है। जो कृष्ण मूर्ति के अंतरतम को पूरा का पूरा प्रतिबिंबित करती है। कृष्ण मूर्ति प्रकृति के सौंदर्य से असीम प्रेम करते थे। जंगलों … Continue reading
दि फर्स्ट एंड लास्ट फ़्रीडम—(ओशो की प्रिय पुस्तकें)
जे. कृष्णामूर्ति यह किताब जे. कृष्णामूर्ति के लेखों का संकलन है। यह उस समय छपी है जब कृष्ण मूर्ति आत्म क्रांति से गुजरकर स्वतंत्र बुद्ध पुरूष के रूप में स्थापित हो चूके थे। लंदन के ‘’विक्टर गोलांझ लिमिटेड’’ प्रकाशन ने … Continue reading
दि बुक—ऐलन वॉटस (ओशो कि प्रिय पुस्तकें)
ऑन दि टैबू अगेंस्ट नोइग हू यू आर–ऐलन वॉटस किताब में प्रवेश करने से पहले खुद ऐलन वॉटस संक्षेप में इसे लिखने की वजह बताता है। ‘’यह किताब मनुष्य के उस निषिद्ध लेकिन अनचीन्हें टैबू के संबंध में है जो … Continue reading





