Category Archives: ओशे अमरत्‍व रस

अहंकार—

अहंकार आत्‍मबोध का आभाव है। आत्म स्मरण का आभाव है। अहंकार अपने को न जानने का दूसरा नाम है। इसलिए अहंकार से मत लड़ों। अहंकार और अंधकार पर्यायवाची है। हां, अपनी ज्‍योति को जला लो। ध्‍यान का दीया बन जाओ। … Continue reading

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मेरा क्‍या काम है?

तुम पूछते हो, मेरा क्‍या काम है। मेरा काम एक ही: तुम्‍हारा नशा तोड़ना है। और तुम्‍हारा यह नशा टूट जाए तो तुम्‍हें उस नशे की तरफ ले चलना है, जो पीओ एक बार तो फिर टूटता ही नहीं।

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