Category Archives: संभोग से समाधि की और

संभोग से समाधि की ओर–ओशो (अठहरवां-प्रवचन)

न भोग, न दमन—वरण जागरण—अठहरवां प्रवचन मेरे प्रिय आत्‍मन, तीन सूत्रों पर हमने बात की है। जीवन क्रांति की दिशा में पहला सूत्र था- ‘सिद्धांतों से, शास्त्रों से मुक्ति।’ जो व्यक्ति किसी भी तरह के मानसिक कारागृह में बंद है, … Continue reading

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संभोग से समाधि की ओर–ओशो (सत्‍तहरवां-प्रवचन)

दमन से मुक्‍ति—सत्‍तहरवां प्रवचन मेरे प्रिय आत्मन ‘जीवन क्रांति के सूत्र’ -इस परिचर्चा के तीसरे सूत्र पर आज चर्चा करनी है। पहला सूत्र था : सिद्धांत शाख और वाद से मुक्ति। दूसरा सूत्र था भीड़ से, समाज से-दूसरों से मुक्ति। … Continue reading

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संभोग से समाधि की ओर–ओशो (सोलहवां प्रवचन)

भीड़ से, समाज से-दूसरों से मुक्ति—सोलहवां प्रवचन मेरे प्रिय आत्मन, मनुष्य का जीवन जैसा हो सकता है, मनुष्य जीवन में जो पा सकता है। मनुष्य जिसे पाने के लिये पैदा होता है-वही उससे छूट जाता है। वह उसे नही मिल … Continue reading

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संभोग से समाधि कीओर–ओर (पन्‍द्रहवां प्रवचन)

सिद्धन, शास्त्र और वाद से मुक्ति—पन्‍द्रंहवां प्रवचन मेरे प्रिय आत्‍मन अभी-अभी सूरज निकला। सूरज के दर्शन कर रहा था। देखा आकाश में दो पक्षी उड़े जा रहे हैं। आकाश में न तो कोई रास्ता है, न कोई सीमा है, न … Continue reading

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संभोग से समाधि की ओर-ओशो ( चौदहवां प्रवचन)

नारी एक और आयाम—प्रवचन चौदहवां स्‍त्री और पुरुष के इतिहास में भेद की, भिन्नता की, लम्बी कहानी जुड़ी हुई है। बहुत प्रकार के वर्ग हमने निर्मित किये हैं। गरीब का, अमीर का; धन के आधार पर, पद के आधार पर। … Continue reading

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संभोग से समाधि की ओर–ओशो (तैरहवां प्रवचन)

नारी और क्रांति—प्रवचन तैरहवां मेरे प्रिय आत्मन व्यक्तियों में ही, मनुष्य में ही सी और पुरुष नहीं होते हैं—पशुओं में भी पक्षियों में भी। लेकिन एक और भी नयी बात आपसे कहना चाहता हू : देशों में भी सी और … Continue reading

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संभोग से समाधि की और–ओशो (बाहरवां प्रवचन)

युवा चित्त का जन्‍म—बाहरवां प्रवचन मेरे प्रिय आत्मन सोरवान विश्वविद्यालय की दीवालों पर जगह—जगह एक नया ही वाक्य लिखा हुआ दिखायी पड़ता है। जगह—जगह दीवालों पर, द्वारों पर लिखा है : ‘ ‘प्रोफेसर्स, यू आर ओल्ड’ ‘ — अध्यापकगण, आप … Continue reading

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सभोग से समाधि की और–ओशो (ग्‍याहरवां प्रवचन)

युवक कौन—ग्‍याहरवां प्रवचन युवकों के लिए कुछ भी बोलने के पहले यह ठीक से समझ लेना जरूरी है कि युवक का अर्थ क्या है? युवक का कोई भी संबंध शरीर की अवस्था से नहीं है। उम्र से युवा है। उम्र … Continue reading

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संभोग से समाधि की और–ओशो (प्रवचन–दसवां)

विद्रोह क्‍या है—प्रवचन दसवां हिप्‍पी वाद मैं कुछ कहूं ऐसा छात्रों ने अनुरोध किया है। इस संबंध में पहली बात, बर्नार्ड शॉ ने एक किताब लिखी है: मैक्‍सिम्‍प फॉर ए रेव्‍होल्‍यूशनरी, क्रांतिकारी के लिए कुछ स्‍वर्ण-सूत्र। और उसमें पहला स्‍वर्ण … Continue reading

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सेक्‍स नैतिक या अनैतिक—ओशो (भाग दो)

हास्‍य और सेक्‍स के बीच क्‍या संबंध है– इनमें निश्‍चित संबंध है; संबंध बहुत सामान्‍य है। सेक्‍स का चरमोत्कर्ष और हंसी एक ही ढंग से होता है; उनकी प्रक्रिया एक जैसी है। सेक्‍स के चरमोत्कर्ष में भी तुम तनाव के … Continue reading

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सेक्‍स नैतिक या अनैतिक: ओशो (भाग-1)

सेक्‍स से संबंधित किसी नैतिकता का कोई भविष्‍य नहीं है। सच तो यह है कि सेक्‍स और नैतिकता के संयोजन ने नैतिकता के सारे अतीत को विषैला कर दिया है। नैतिकता इतनी सेक्‍स केंद्रित हो गई कि उसके दूसरे सभी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—38 ( विद्रोह क्या— है? )

विद्रोह क्‍या है? दूसरा सूत्र है—सहज जीवन—जैसे हैं, है। लेकिन सहज होना बहुत कठिन है। सहज होना सच में ही बहुत कठिन बात है। क्‍योंकि हम इतने असहज हो गए है कि हमने इतनी यात्रा कर ली है। अभिनय की … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—37 ( विद्रोह क्‍या है?)

हिप्‍पी वाद मैं कुछ कहूं ऐसा छात्रों ने अनुरोध किया है। इस संबंध में पहली बात, बर्नार्ड शॉ ने एक किताब लिखी है: मैक्‍सिम्‍प फॉर ए रेव्‍होल्‍यूशनरी, क्रांतिकारी के लिए कुछ स्‍वर्ण-सूत्र। और उसमें पहला स्‍वर्ण बहुत अद्भुत लिखा है। … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—36(जनसंख्‍या विस्‍फोट)

जनसंख्‍या विस्‍फोट प्रश्‍न कर्ता: भगवान श्री, एक और प्रश्‍न है कि परिवार नियोजन जैसा अभी चल रहा है उसमें हम देखते है कि हिन्‍दू ही उसका प्रयोग कर रहे है, और बाकी और धर्मों के लोग ईसाई, मुस्‍लिम, ये सब … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—35

जनसंख्‍या विस्‍फोट प्रश्‍नकर्ता: भगवान श्री, परिवार नियोजन के बारे में अनेक लोग प्रश्‍न करते है कि परिवार द्वारा अपने बच्‍चों की संख्‍या कम करना धर्म के खिलाफ है। क्‍योंकि उनका कहना है कि बच्‍चे तो ईश्‍वर की देन है, और … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—34

जनसंख्‍या विस्‍फोट कुछ प्रश्‍न उठाये जाते है। यहां उनके उत्‍तर देना पसंद करूंगा:– एक मित्र ने पूछा है कि अगर यह बात समझायी जाये तो जो समझदार है, बुद्धिजीवी है, इंटेलिजेन्‍सिया है, मुल्‍क का जो अभिजात वर्ग है, बुद्धिमान और … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—33

जनसंख्‍या विस्‍फोट जीने का क्‍या अर्थ? जीने का इतना ही अर्थ है कि ‘ईग्जस्ट’ करते है। हम दो रोटी खा लेते है, पानी पी लेते है। और कल तक के लिए जी लेते है। लेकिन जीना ठीक अर्थों में तभी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—32

जनसंख्‍या विस्‍फोट और बहुत से अनजाने मानसिक दबाब भी है। गुरुत्वाकर्षण तो भौतिक दबाव हे; लेकिन चारों तरफ से लोगों की मोजूदगी भी हमको दबा रही है। वे भी हमें भीतर की तरफ प्रेस कर रहे है। सिर्फ उनकी मौजूदगी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और–31

जनसंख्‍या का विस्‍फोट- पृथ्‍वी के नीचे दबे हुए, पहाड़ों की कंदराओं में छिपे हुए, समुद्र की सतह में खोजें गये बहुत से ऐसे पशुओ के अस्‍थिर पंजर मिले है, जिनका अब कोई नामों निशान नहीं रह गया है। वे कभी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—30

प्रेम ओर विवाह– अगर मनुष्‍य जाति को परमात्‍मा के निकट लाना है, तो पहला काम परमात्‍मा की बात मत करिये। मनुष्‍य जाति को प्रेम के निकट ले आइये। जीवन जोखिम भरा है। न मालूम कितने खतरे हो सकते है। जीवन … Continue reading

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