Category Archives: संभोग से समाधि की और

सेक्‍स नैतिक या अनैतिक—ओशो (भाग दो)

हास्‍य और सेक्‍स के बीच क्‍या संबंध है– इनमें निश्‍चित संबंध है; संबंध बहुत सामान्‍य है। सेक्‍स का चरमोत्कर्ष और हंसी एक ही ढंग से होता है; उनकी प्रक्रिया एक जैसी है। सेक्‍स के चरमोत्कर्ष में भी तुम तनाव के … Continue reading

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सेक्‍स नैतिक या अनैतिक: ओशो (भाग-1)

सेक्‍स से संबंधित किसी नैतिकता का कोई भविष्‍य नहीं है। सच तो यह है कि सेक्‍स और नैतिकता के संयोजन ने नैतिकता के सारे अतीत को विषैला कर दिया है। नैतिकता इतनी सेक्‍स केंद्रित हो गई कि उसके दूसरे सभी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—38 ( विद्रोह क्या— है? )

विद्रोह क्‍या है? दूसरा सूत्र है—सहज जीवन—जैसे हैं, है। लेकिन सहज होना बहुत कठिन है। सहज होना सच में ही बहुत कठिन बात है। क्‍योंकि हम इतने असहज हो गए है कि हमने इतनी यात्रा कर ली है। अभिनय की … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—37 ( विद्रोह क्‍या है?)

हिप्‍पी वाद मैं कुछ कहूं ऐसा छात्रों ने अनुरोध किया है। इस संबंध में पहली बात, बर्नार्ड शॉ ने एक किताब लिखी है: मैक्‍सिम्‍प फॉर ए रेव्‍होल्‍यूशनरी, क्रांतिकारी के लिए कुछ स्‍वर्ण-सूत्र। और उसमें पहला स्‍वर्ण बहुत अद्भुत लिखा है। … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—36(जनसंख्‍या विस्‍फोट)

जनसंख्‍या विस्‍फोट प्रश्‍न कर्ता: भगवान श्री, एक और प्रश्‍न है कि परिवार नियोजन जैसा अभी चल रहा है उसमें हम देखते है कि हिन्‍दू ही उसका प्रयोग कर रहे है, और बाकी और धर्मों के लोग ईसाई, मुस्‍लिम, ये सब … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—35

जनसंख्‍या विस्‍फोट प्रश्‍नकर्ता: भगवान श्री, परिवार नियोजन के बारे में अनेक लोग प्रश्‍न करते है कि परिवार द्वारा अपने बच्‍चों की संख्‍या कम करना धर्म के खिलाफ है। क्‍योंकि उनका कहना है कि बच्‍चे तो ईश्‍वर की देन है, और … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—34

जनसंख्‍या विस्‍फोट कुछ प्रश्‍न उठाये जाते है। यहां उनके उत्‍तर देना पसंद करूंगा:– एक मित्र ने पूछा है कि अगर यह बात समझायी जाये तो जो समझदार है, बुद्धिजीवी है, इंटेलिजेन्‍सिया है, मुल्‍क का जो अभिजात वर्ग है, बुद्धिमान और … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—33

जनसंख्‍या विस्‍फोट जीने का क्‍या अर्थ? जीने का इतना ही अर्थ है कि ‘ईग्जस्ट’ करते है। हम दो रोटी खा लेते है, पानी पी लेते है। और कल तक के लिए जी लेते है। लेकिन जीना ठीक अर्थों में तभी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—32

जनसंख्‍या विस्‍फोट और बहुत से अनजाने मानसिक दबाब भी है। गुरुत्वाकर्षण तो भौतिक दबाव हे; लेकिन चारों तरफ से लोगों की मोजूदगी भी हमको दबा रही है। वे भी हमें भीतर की तरफ प्रेस कर रहे है। सिर्फ उनकी मौजूदगी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और–31

जनसंख्‍या का विस्‍फोट- पृथ्‍वी के नीचे दबे हुए, पहाड़ों की कंदराओं में छिपे हुए, समुद्र की सतह में खोजें गये बहुत से ऐसे पशुओ के अस्‍थिर पंजर मिले है, जिनका अब कोई नामों निशान नहीं रह गया है। वे कभी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—30

प्रेम ओर विवाह– अगर मनुष्‍य जाति को परमात्‍मा के निकट लाना है, तो पहला काम परमात्‍मा की बात मत करिये। मनुष्‍य जाति को प्रेम के निकट ले आइये। जीवन जोखिम भरा है। न मालूम कितने खतरे हो सकते है। जीवन … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—29

प्रेम ओर विवाह– मेरी दृष्‍टि में जब तक एक स्‍त्री और पुरूष परिपूर्ण प्रेम के आधार पर मिलते हे, उनका संभोग होता है। उनका मिलन होता है तो उस परिपूर्ण प्रेम के तल पर उनके शरीर ही नहीं मिलते है। … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—28

प्रेम ओर विवाह– प्रेम जो है, वह व्‍यक्‍तित्‍व की तृप्‍ति का चरम बिंदु है। और जब प्रेम नहीं मिलता है तो व्‍यक्‍तित्‍व हमेशा मांग करता है कि मुझे पूर्ति चाहिए। व्‍यक्‍तित्‍व हमेशा तड़पता हुआ अतृप्‍त हमेशा अधूरा बेचैन रहता है। … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—27

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संभोग से समाधि की और—26

युवक और यौन— जिस दिन दुनिया में सेक्‍स स्‍वीकृत होगा, जैसा कि भोजन, स्‍नान स्‍वीकृत है। उस दिन दुनिया में अश्‍लील पोस्‍टर नहीं लगेंगे। अश्‍लील किताबें नहीं छपेगी। अश्‍लील मंदिर नहीं बनेंगे। क्‍योंकि जैसे-जैसे वह स्‍वीकृति होता जाएगा। अश्‍लील पोस्‍टरों … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—25

युवक और यौन— आदमी के मन का नियम उलटा है। इस नियमों का उलटा नहीं हो सकता है। हां कुछ जो बहुत ही कमजोर होंगे, वह शायद नहीं आ पायेंगे तो रात सपने में उनको भी वहां आना पड़ेगा। मन … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—24

युवक और यौन— एक कहानी से मैं अपनी बात शुरू करना चाहूंगा। एक बहुत अद्भुत व्‍यक्‍ति हुआ है। उस व्‍यक्‍ति का नाम था नसीरुद्दीन एक दिन सांझ वह अपने घर से बाहर निकलता था मित्रों से मिलने के लिए। तभी … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—23

यौन : जीवन का ऊर्जा-आयाम–6 इस लिए मैं तंत्र के पक्ष में हूं, त्‍याग के पक्ष में नहीं हूं। और मेरा मानना है जब तक धर्म दुनिया से समाप्‍त नहीं होते, तब तक दुनिया सुखी नहीं हो सकती। शांत नहीं … Continue reading

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संभोग से समाधि की और—22

जैसे हम स्‍वास ले रहे है हवा में उससे भी गहरा हमारा आस्‍तित्‍व कामवासना में है। क्‍योंकि स्‍वास लेना तो बहुत बाद में शुरू होता है। बच्‍चा जब मां के पेट से पैदा होगा और जब रौएगा। तब पहली स्‍वास लेगा। इसके पहले भी नौ महीने वह जिंदा रह चुका हे। और वह नौ महीने जो जिंदा रह चुका है, वह तो उसकी काम उर्जा का ही फैलाव हे। तो वह जो काम उर्जा से हमारा सारा शरीर निर्मित है, स्‍वास से भी गहरा हमारा उसमे अस्‍तित्‍व छिपा हुआ है, उससे भागकर कोई भी बच सकता है। क्‍योंकि भागकर कोई बच नहीं सकता, क्‍योंकि भागोगे कहां। वह तुम्‍हारे भीतर है, तुम ही हो। मैं तो कहता हूं उससे भागने की कोई जरूरत नहीं हे। और भाग कर उपद्रव में पड़ जाता है। तो जीवन में जो है उसका सहज अनुभव उसका स्‍वीकार।
–ओशो Continue reading

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संभोग से समाधि की और—21

समाधि : संभोग-उर्जा का अध्‍यात्‍मिक नियोजन—5 एक मित्र ने पूछा है कि अगर इस भांति सेक्‍स विदा हो जायगा तो दुनिया में संतति का क्‍या होगा? अगर इस भांति सारे लोग समाधि का अनुभव करके ब्रह्मचर्य को उपलब्‍ध हो जायेंगे … Continue reading

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