सात शरीर और सात चक्र—(।)

सात शरीर ओर सात चक्र--ओशो

सात शरीर ओर सात चक्र--ओशो


पहला शरीर—मूलाधार चक्र

जैसे सात शरीर है, ऐसे ही सात चक्र भी है। और प्रत्‍येक एक चक्र मनुष्‍य के एक शरीर से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। भौतिक शरीर, फिजिकल बॉडी, इस शरीर का जो चक्र है वह मूलाधार है; वह पहला चक्र है। इस मूलाधार का भौतिक शरीर से केंद्रीय संबंध है; यह भौतिक शरीर का केंद्र हे। इस मूलाधार चक्र की दो संभावनाएं है। एक इसकी प्रकृतिक संभावना है, जो हमें जन्‍म से मिलती है। और एक साधना की संभावना है, जो साधना से उपलब्‍ध होती है।

मूलाधार चक्र की प्राथमिक प्राकृतिक संभावना कामवासना है, जो हमें प्रकृति से मिलती है। वह भौतिक शरीर की केंद्रीय वासना है। अब साधक के सामने पहला ही सवाल यह उठेगा कि वह जो केंद्रीय तत्‍व है उसके भौतिक शरीर का, इसके लिए क्‍या करे। और इस चक्र की एक दूसरी संभावना है, जो साधना से उपलब्‍ध होगी, वह है ब्रह्मचर्य। सेक्‍स इसकी प्राकृतिक संभावना है और ब्रह्मचर्य इसकी ट्रांसफॉमेंशन है, इसका रूपांतरण है। जितनी मात्रा में चित कामवासना से केंद्रित और ग्रसित होगा उतना ही मूलाधार अपनी अंतिम संभावनाओं को उपलब्‍ध नहीं कर सकेगा। उसकी अंतिम संभावना ब्रह्मचर्य है। उस चक्र की दो संभावनाएं है: एक जो हमें प्रकृति से मिली, और एक जो हमें साधना से मिलेगी।

न भोग, न दमन—वरन जागरण

अब इसका मतलब यह हुआ कि जो हमें प्रकृति से मिली है उसके साथ हम दो काम कर सकते है : या तो जो प्रकृति से मिला है हम उसमें जीते रहें,तब जीवन में साधना शुरू नहीं हो पायेंगे; दूसरा काम जो संभव है वह यह कि हम इसे रूपांतरित करें।

रूपांतरण के पथ पर जो बड़ा खतरा है वह खतरा यहीं है कि कहीं हम प्राकृतिक केंद्र से लड़ने न लगें। साधक के मार्ग में खतरा क्‍या है? या तो जो प्राकृतिक व्‍यवस्‍था है वह उसको भोगे, तब वह उठ नहीं पाता उस तक जो चरम संभावना है—जहां तक उठा जा सकता था; भौतिक शरीर जहां तक उसे पहुंचा सकता था वहाँ तक वह नहीं पहुंच पाता; जहां से शुरू होता है वहीं अटक जाता है। तो एक तो भोग है, दूसरा दमन है कि उससे लड़े। दमन बाधा है साधक के मार्ग पर—पहले केंद्र की जो बाधा है; क्‍योंकि दमन के द्वारा कभी ट्रांसफॉमेंशन (रूपांतरण) नहीं होता।

दमन बाधा है तो साधक क्‍या बनेगा? साधन क्‍या होगा? समझ साधन बनेगी, अंडरस्‍टैंडिंग साधन बनेगी। कामवासना को जो जितना समझ पायेगा उतना ही उसके भीतर रूपांतरण होने लगेगा। उसका कारण है; प्रकृति के सभी तत्‍व हमारे भीतर अंधे और मूर्छित है। अगर हम उन तत्‍वों के प्रति होश पूर्ण हो जायें तो उनमें रूपांतरण होना शुरू हो जाता है।

जैसे ही हमारे जैसे ही हमारे भीतर कोई चीज जागनी शुरू होती है वैसे ही प्रकृति के तत्‍व बदलने शुरू हो जाते है। जागरण कीमिया है, अवेयरनेस केमिस्‍ट्री है उनके बदलने की, रूपांतरण की। तो अगर कोई अपनी कामवासना के प्रति पूरे भाव और पूरे चित पूरी समझ से जागे, तो उसके भीतर कामवासना की जगह ब्रह्मचर्य का जन्‍म शुरू हो जाता है। और जब तक कोई पहले शरीर पर ब्रह्मचर्य पर न पहुंच जाये तब तक दूसरे शरीर की संभावनाओं के साथ काम करना बहुत कठिन है।

–ओशो
जिन खोजा तिन पाईयां, गहरेपानी पैठ,
प्रश्‍नोत्‍तर चर्चाएं, बंबई,
प्रवचन–8

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About Mansa Anand

ओशो की किरण जीवन में जिस दिन से प्रवेश किया, वहीं से जीवन का शुक्‍ल पक्ष शुरू हुआ, कितना धन्‍य भागी हूं ओशो को पा कर उस के लिए शब्‍द नहीं है मेरे पास.....अभी जीवन में पूर्णिमा का उदय तो नहीं हुआ है। परन्‍तु क्‍या दुज का चाँद कम सुदंर होता है। देखे कोई मेरे जीवन में झांक कर। आस्‍तित्‍व में सीधा कुछ भी नहीं है...सब वर्तुलाकार है , फिर जीवन उससे भिन्‍न कैसे हो सकता है। कुछ अंबर की बात करे, कुछ धरती का साथ धरे। कुछ तारों की गूंथे माला, नित जीवन का सिंगार करे।।
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12 Responses to सात शरीर और सात चक्र—(।)

  1. पिगबैक: Tweets that mention सात शरीर और सात चक्र—(।) | Osho Satsang/ओशो सत्‍संग -- Topsy.com

  2. satish ravi says:

    जब से मैंने ओशो के बारे में जाना है पागल सा हो गया हु उसके लिए,और ओशो के कुंडलिनी जागरण विधि के प्रति मेरी जबरजस्त दीवानगी है,पर खुद के द्वारा अकेले इन विधियों का प्रयोग करने में डरता भी हु,कृपया मुझे बताये की क्या कुंडली जागरण की विधि को कोई अकेले प्रयोग करके कुंडली को जागृत करने में सक्षम हो सकता है और यदि नहीं तो किसी गुरु की आवश्यकता पड़ेगी….और अगर गुरु की आवश्यकता पड़ेगी तो गुरु की खोज कैसे करू?

    • ओशो ने कंडलिनी ध्‍यान की विधि को सहज बनाया है। उसकी एकसी.डी. मिल जायेगी। आपध्‍यान कैन्‍द्र से ले सकते है। पूराने जमाने का कुंडलिनी ध्‍यान हाठ योग था वह खतरनाक था परन्‍तु ओशो ने उसे सहज बना दिया है इसे आप अकेले भी अपने कमरे में कर सकते है।
      पूस्‍तका जिसमें इस ध्‍यान के विषय में लिखाहै ”ध्‍यान प्रथम ओर अंतिम मुक्‍ति” मेंविघि का पूरा विवरण है।
      स्‍वामी आनंद प्रसाद

    • ritu says:

      jai gurudev…shree shree ravishankar ji ke art of living se jud jao…wahan sab kuchh milega….sadguru bhi aur aadhyatmik sadhna bhi

  3. पिगबैक: “बहुत टेंशन है….टेंशन तो हम सबको है….और सबकी टेंशन की एक ही वजह है….योनि….” | विशुद्ध चैतन्

  4. पिगबैक: “बहुत टेंशन है….टेंशन तो हम सबको है….और सबकी टेंशन की एक ही वजह है….योनि….” | विशुद्ध चैतन्

  5. पिगबैक: “बहुत टेंशन है….टेंशन तो हम सबको है….और सबकी टेंशन की एक ही वजह है….योनि….” | धर्म-अधर्म

  6. Today, I went to the beach with my children. I found a sea shell and gave it to my 4 year old daughter and
    said “You can hear the ocean if you put this to your ear.” She placed the shell to her
    ear and screamed. There was a hermit crab inside and it pinched her ear.
    She never wants to go back! LoL I know this
    is totally off topic but I had to tell someone!

  7. sbobet says:

    This is a topic which is close to my heart… Cheers!
    Exactly where are your contact details though?

  8. Does your website have a contact page? I’m having a tough time locating it but, I’d like to shoot you
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